Sunday, August 23, 2026
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भारत के साथ व्यापार समझौता ‘जल्द’ हो सकता है : व्हाइट हाउस आर्थिक सलाहकार

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वाशिंगटन, 18 नवंबर (आईएएनएस)। अमेरिका के व्हाइट हाउस के आर्थिक सलाहकार केविन हैसेट ने सोमवार को कहा कि भारत के साथ व्यापार समझौता जल्दी ही हो सकता है।

सीएनबीसी से बात करते हुए उन्होंने बताया कि भारत और अमेरिका अच्छे मित्र हैं और ट्रंप प्रशासन इस समझौते को लेकर अभी भी बहुत आशावान है।

उन्होंने कहा, “हम आशावान हैं। भारत हमारा मित्र देश है और हम उम्मीद करते हैं कि बात जल्दी बन जाएगी।”

हैसेट ने यह भी कहा कि मामला थोड़ा जटिल है, क्योंकि भारत के रूस के साथ भी घनिष्ठ संबंध हैं। भारत–अमेरिका रिश्तों में कई तरह के पहलू हैं, जिससे स्थिति और जटिल हो जाती है।

उधर, इसी दिन भारत के वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने भी संकेत दिए कि व्यापार समझौता लगभग अंतिम चरण में है।

अग्रवाल ने दिल्ली में पत्रकारों को बताया कि दोनों देश द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर नियमित रूप से ऑनलाइन बैठकें कर रहे हैं। भले ही कोई तय समय सीमा नहीं है, लेकिन बातचीत का पहला चरण तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।

पिछले सप्ताह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी भारत–अमेरिका संबंध मजबूत करने पर सकारात्मक संकेत दिए थे। इससे उम्मीद बढ़ी है कि दोनों बड़े लोकतांत्रिक देशों के बीच व्यापार समझौता जल्द हो सकता है।

ट्रंप ने गुरुवार को व्हाइट हाउस में पत्रकारों को बताया कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी बातचीत “बहुत अच्छी” चल रही है और अगले साल दिल्ली की उनकी यात्रा हो सकती है

सोमवार को ट्रंप ने यह भी कहा कि वे भारत पर लगाये गए शुल्क भविष्य में कम कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि भारत के साथ ऐसा समझौता बनने के काफी करीब हैं, जो सभी के लिए लाभकारी होगा।

हालांकि भारत के कुछ अधिकारी समझौते को लेकर आशावान हैं, लेकिन वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया कि भारत अन्य देशों के साथ होने वाले व्यापार समझौतों में किसानों, डेयरी क्षेत्र और श्रमिकों के हितों से समझौता नहीं करेगा।

उन्होंने कहा कि भारत एक न्यायसंगत और संतुलित व्यापार समझौता चाहता है और इसका समय दोनों देशों की तैयारी पर निर्भर करेगा। उन्होंने कहा कि व्यापार समझौता कल भी हो सकता है, अगले महीने भी या अगले वर्ष भी… सरकार हर स्थिति के लिए तैयार है।

इसी बीच, भारत अमेरिका से तेल और गैस की खरीद भी बढ़ा रहा है, ताकि दोनों देशों के बीच व्यापार संतुलन बेहतर हो सके।