नई दिल्ली, 29 नवंबर (आईएएनएस)। भारतीय फुटबॉल मौजूदा समय में अपने न्यूनतम स्तर पर है। पिछले एक दशक में भारतीय टीम फीफा की रैंकिंग में सबसे नीचे है। नवंबर की शुरुआत में हमें बांग्लादेश से भी हार का सामना करना पड़ा था। यह समय मंथन का है कि कैसे भारतीय फुटबॉल का उत्थान हो और हम बड़ी टीमों को मजबूती से टक्कर देने की स्थिति में आ सकें।
भारतीय फुटबॉल की स्थिति सुधारने के लिए विदेशी खिलाड़ियों को शामिल किया जा रहा है। हाल ही में ऑस्ट्रेलिया के रायन विलियम्स को भारत की नागरिकता दी गई है। वह अब भारत की तरफ से खेलेंगे। विलियम्स के आने से भारतीय फुटबॉल टीम में व्यापक सुधार की उम्मीद की जा रही है।
भारतीय फुटबॉल टीम के टीम के हेड कोच खालिद जमील ने कहा है कि टीम को मजबूत बनाने के लिए हमें विदेशी खिलाड़ियों की जगह भारतीय मूल के खिलाड़ियों को जगह देनी चाहिए।
एक रिपोर्ट के मुताबिक जमील ने कहा, “हमने रायन विलियम्स को ले लिया है। उनके जैसे और भारतीय मूल के खिलाड़ियों को लाने की ज़रूरत है। हमें उन खिलाड़ियों का चयन करना होगा, जो चयन के लिए उपलब्ध हैं और जो देश के लिए खेलना चाहते हैं। हमें खिलाड़ियों का पूल बढ़ाना होगा। प्रतिस्पर्धी खेल का अवसर बढ़ाना होगा। भारतीय फुटबॉल की दशा सुधारने के लिए यह आवश्यक है।”
उन्होंने कहा, “बांग्लादेश से मिली हार ने भारतीय फुटबॉल की बुनियादी समस्याओं को उजागर किया। टीम में एकजुटता की कमी दिखी, खिलाड़ी थके हुए लग रहे थे, और फैसले लेने में अंतर था। हमारी व्यवस्था भी अंतरराष्ट्रीय स्तर की नहीं है। आईएसएल फाइनल नहीं हुआ है। टेंडर के लिए कोई बोली लगाने वाला नहीं है। खिलाड़ियों के पास उच्चस्तरीय खेल का अवसर नहीं है। यह हमारी कमजोरियों को दिखाता है। इससे जल्दी बाहर निकलना होगा।”
खालिद जमील का अगला लक्ष्य अगले साल होने वाले एशियन गेम्स हैं। अगर भारतीय टीम हिस्सा लेती है, तो मुख्य कोच अंडर-23 का कोर बनाने की नीति पर काम करना चाहते हैं। इसमें तीन से चार सीनियर खिलाड़ी होंगे। हम जितना खेलेंगे उतना अच्छा होगा।
भारतीय फुटबॉल की स्थिति को सुधारने के दृष्टिकोण से 1 अगस्त 2025 को खालिद जमील को नया मुख्य कोच घोषित किया गया था।




