दुर्ग की जागृति साहू: ‘मशरूम लेडी’ से बनी ड्रोन दीदी, महिलाओं के लिए प्रेरणा

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दुर्ग, 30 नवंबर (आईएएनएस)। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में मतवारी गांव की रहने वाली जागृति साहू की कहानी प्रेरणा से भरी है। जागृति का सफर एक सामान्य महिला से लेकर ‘लखपति दीदी’ बनने और आज ‘ड्रोन दीदी’ के रूप में कृषि को उन्नति की ओर ले जा रहा है।

जागृति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल ‘नमो ड्रोन दीदी’ में चयनित होकर उन्होंने ड्रोन चलाने का प्रशिक्षण लिया। आज वह एक प्रमाणित ‘ड्रोन पायलट’ हैं और ‘ड्रोन दीदी’ के नाम से जानी जाती हैं। ड्रोन के माध्यम से वह खेतों में दवाइयों का छिड़काव करती हैं और इस नई तकनीक का लाभ किसानों तक पहुंचाती हैं। इससे किसानों का समय तो बचता ही है, साथ ही श्रम और खर्च भी कम होता है।

जागृति साहू ने आईएएनएस को बताया कि वे ‘ड्रोन दीदी’ के तहत 2023 से काम कर रही हैं। ‘ड्रोन दीदी’ के रूप में इफको के माध्यम से उनका चयन हुआ। जागृति ने कहा, “जब मुझे पता चला कि मेरा चयन ड्रोन दीदी के रूप में हुआ है तो हाउस वाइफ से आकर तकनीकी क्षेत्र में रोमांच से भरा सफर था। मुझे भरोसा था कि मैं यह चीजें कर सकती हूं।”

उन्होंने कहा, “मुझे इफको की ओर से 15 दिन की ट्रेनिंग के लिए ग्वालियर भेजा गया था। ट्रेनिंग पूरी करने के बाद हमने कृषि क्षेत्र में काम किया।” जागृति साहू ने बताया कि कृषि के काम के लिए मजदूरों का नहीं मिलना एक बड़ी परेशानी थी। नई तकनीक के साथ कृषि के क्षेत्र में नवाचार करते हुए काम कर रहे हैं, जिससे लोगों का रुझान कृषि के क्षेत्र में फिर से लौट रहा है।

जागृति ने दो विषयों में पोस्ट ग्रेजुएट और बीएड की डिग्री हासिल की है। बचपन से ही जागृति का सपना शिक्षक बनने का था, लेकिन किसी कारणवश वह अपने इस सपने को पूरा नहीं कर पाई, जिससे वह निराश हो गईं।

उन्होंने आईएएनएस से बातचीत में कहा, “शादी के बाद बहुत कम लोगों को ही अपना सपना पूरा करने का मौका मिलता है। एक समय मैं भी नौकरी करना चाहती थी और रोजगार में आने के लिए मुझे प्रशिक्षक नहीं मिलते थे। तब मैंने सोचा कि क्यों न मैं एक प्रशिक्षक के रूप में महिलाओं के साथ जुड़कर उन्हें आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर करूं।”

उनका कहना है कि परिवार की तरफ से पूरा समर्थन मिला और आज वे जो कुछ भी हैं, वे परिवार के कारण हैं।

जागृति का सफर यहीं नहीं रुका। जागृति ने शासन की योजनाओं का लाभ लिया और एक सामान्य महिला से अपनी अलग पहचान बनाई। मशरूम की खेती से नई ऊंचाइयां प्राप्त करने पर उन्हें ‘मशरूम लेडी ऑफ दुर्ग’ कहा जाने लगा।