नई दिल्ली, 30 नवंबर (आईएएनएस)। राहुल गांधी और अन्य के खिलाफ नेशनल हेराल्ड के भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के केस में दर्ज एक नई एफआईआर को लेकर कांग्रेस पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस का कहना है कि यह सब झूठ है, बेबुनियाद है और उन्हें जानबूझकर फंसाने की कोशिश की जा रही है। इस पर भाजपा के वरिष्ठ नेता और सांसद रविशंकर प्रसाद ने पूरे मामले को विस्तार से समझाते हुए कांग्रेस के आरोपों पर पलटवार किया।
रविशंकर प्रसाद ने कहा कि सबसे पहले तो ये समझना जरूरी है कि यह मामला मोदी सरकार आने के बहुत पहले का है। ईडी ने जो भी कार्रवाई की है, वह नेशनल हेराल्ड के पूरे इतिहास, उसकी कंपनियों, उसके लेन-देन और उससे जुड़ी प्रक्रियाओं को देखने के बाद ही की गई है।
उन्होंने कहा कि नेशनल हेराल्ड चलाने वाली कंपनी ‘एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड’ पर करीब 90 करोड़ रुपए का लोन था, जो कांग्रेस पार्टी ने दिया था। बाद में एक नई कंपनी बनाकर ‘यंग इंडिया लिमिटेड’ के माध्यम से संभवत: उसके पूरे शेयर को खरीद लिया गया और वह भी सिर्फ 50 लाख रुपए में। यह सौदा बेहद असामान्य था, क्योंकि 90 करोड़ का लोन पहले माफ किया गया और फिर कंपनी के सारे शेयर नई कंपनी को सिर्फ 50 लाख रुपए में दे दिए गए।
रविशंकर प्रसाद ने बताया कि यंग इंडिया कंपनी में सोनिया गांधी और राहुल गांधी की लगभग 76 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। बाकी हिस्सेदारी कुछ अन्य के पास थी, जिनमें ऑस्कर फर्नांडिस भी शामिल थे। उनका आरोप है कि इस प्रक्रिया से यंग इंडिया के हाथ में एसोसिएटेड जर्नल्स की उन तमाम बड़ी-बड़ी संपत्तियों का नियंत्रण आ गया, जो देश के कई शहरों में जैसे दिल्ली, मुंबई, लखनऊ, भोपाल, चंडीगढ़, पटना आदि में स्थित हैं। उन्होंने कहा कि ये सारी जमीनें कांग्रेस सरकार द्वारा बहुत कम कीमत पर दी गई थीं और इन पर बड़ी इमारतें खड़ी की गईं, जिनसे काफी किराया मिलता है।
उनका कहना है कि ‘यंग इंडिया लिमिटेड’ के माध्यम से राहुल गांधी और सोनिया गांधी ने कम पैसे देकर हजारों करोड़ रुपए की संपत्ति पर मालिकाना हक पा लिया। 90 करोड़ के लोन पर 50 लाख रुपए देकर पूरे एसोसिएट जनरल को शेयर होल्डिंग को अपनी नई कंपनी में डाल देना और उसके माध्यम से पूरे देश में जितनी भी बिल्डिंग्स थीं, उन सबके भी मालिकाना हक प्राप्त कर लिया।
सांसद रविशंकर प्रसाद ने कहा कि जब इस मामले में शिकायत दर्ज हुई तो कांग्रेस नेता अलग-अलग अदालतों में गए, लेकिन उन्हें राहत नहीं मिली। दिल्ली हाईकोर्ट और बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा कि उन्हें ट्रायल फेस करना होगा। इसके बाद इनकम टैक्स विभाग ने भी कांग्रेस के इस दावे को खारिज कर दिया था कि यह ट्रस्ट चैरिटेबल है। इनकम टैक्स विभाग ने कहा था कि यह कोई चैरिटेबल ट्रस्ट नहीं है, बल्कि यह सीधा संपत्ति हड़पने का मामला है।
इसके बाद जांच एजेंसियों ने अपनी जांच आगे बढ़ाई और अंत में दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एफआईआर दर्ज की। इस एफआईआर में कांग्रेस नेता सोनिया गांधी और राहुल गांधी समेत 6 लोगों और 3 कंपनियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
उन्होंने कहा कि आप पूरे अकाउंट की फर्जीवाड़ा करके किसी कंपनी को ओन कर लेंगे। उसके माध्यम से हजारों करोड़ की संपत्ति ले लेंगे और आप कहेंगे हमें फंसाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह सीधा-सीधा लूट का मामला है, इसलिए कानून अपना काम कर रहा है और उसे करने दें।
उन्होंने कहा कि यह मामला पुराना है, इसलिए पुराने कानूनों के हिसाब से ही चलेगा। कांग्रेस यह कहकर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रही है कि उन्हें राजनीतिक तौर पर फंसाया जा रहा है, जबकि अदालतों और जांच एजेंसियों द्वारा पहले ही कई बार उनके तर्कों को खारिज किया जा चुका है।
रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी बेबुनियाद आरोप लगाकर सिर्फ लोगों को गुमराह कर रही है। उन्होंने कहा कि भाषण देने के बजाय कांग्रेस को जो कुछ हुआ उसका हिसाब देना चाहिए।




