ऑस्ट्रेलिया के बाद भारत में भी बैन होना चाहिए सोशल मीडिया? जानें क्या है लोगों की राय

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मुंबई, 12 दिसंबर (आईएएनएस)। ऑस्ट्रेलिया ने 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पूरी तरह बैन करने का फैसला लिया है, जिसके बाद देशभर में इस बात को लेकर बहस जारी है कि भारत में बच्चों को विवादित कंटेंट से बचाने और स्क्रीन एडिक्शन से रोकने के लिए सरकार क्या कदम उठाने वाली है?

अभिनेता सोनू सूद ने भी भारत सरकार से ऑस्ट्रेलिया की तर्ज पर बच्चों के सोशल मीडिया यूज पर बैन लगाने की अपील की थी, लेकिन आम जनता का इस बारे में कुछ और ही कहना है। कुछ लोग बैन का समर्थन कर रहे हैं, जबकि कुछ लोगों का कहना है कि सोशल मीडिया को सीमित किया जाए।

आईएएनएस से खास बातचीत करते हुए एक शख्स ने कहा कि सोशल मीडिया को पूरी तरह बैन कर देना कोई समाधान नहीं है। जिस चीज के लिए मना किया जाएगा, बच्चे वही काम सबसे ज्यादा करेंगे। ऐसे में सरकार और माता-पिता दोनों को निर्धारित करना होगा कि बच्चे को क्या दिखाया जाए और क्या नहीं, लेकिन साथ ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी विवादित कंटेंट को लेकर कड़े नियम बनाने की जरूरत है।

एक अन्य लड़की ने कहा कि अगर 15 साल के बच्चों के लिए सोशल मीडिया को बैन किया जाए तो इस फैसले में कोई बुराई नहीं है, क्योंकि 10वीं-12वीं क्लास के बच्चों को पढ़ाई पर ध्यान देना चाहिए, लेकिन सोशल मीडिया के जरिए ही वे गलत चीजों की तरफ आकर्षित हो रहे हैं। सोशल मीडिया पर न चाहते हुए भी कुछ चीजें ऐसी आ जाती हैं, जिनसे बच्चे गलत काम करने के लिए प्रेरित हो जाते हैं।

आईएएनएस ने इस मुद्दे को लेकर कुछ जेन-जी से भी बात की, जिन्होंने सोशल मीडिया बैन का विरोध किया। जेन-जी का कहना है कि सोशल मीडिया के जरिए एक-दूसरे से कनेक्ट होने का मौका मिलता है और इसी के जरिए चीजों को एक्सप्लोर कर सकते हैं।

एक बच्चे ने कहा कि सोशल मीडिया कमाई और अपना टैलेंट दिखाने का मंच बन गया है, लेकिन कुछ लोग इसके एडिक्ट हो गए हैं। ऐसे में बैन लगाने की बजाय कुछ नियमों को रेगुलेट किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए भी सोशल मीडिया यूज अलाउड होना चाहिए, क्योंकि सोशल मीडिया बहुत अच्छी चीज है, जिससे बच्चों को कुछ न कुछ सीखने को मिलता है। सोशल मीडिया पर सब कुछ गलत नहीं होता है। अगर कुछ गलत है तो बहुत सारे लाभ भी हैं।