नई दिल्ली, 12 दिसंबर (आईएएनएस)। विदेश मंत्रालय (एमईए) ने शुक्रवार को संसद को सूचित किया कि पिछले नौ वर्षों में विदेशों में रहने या काम करने वाले भारतीयों की मौत के मामलों में किसी तरह की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज नहीं हुई है। मंत्रालय ने बताया कि वर्ष 2016 से 2025 के बीच कुल 54,511 भारतीय नागरिकों के पार्थिव शरीर स्वदेश लाए गए हैं।
लोकसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने यह जानकारी दी।
सवाल में पार्थिव शरीरों को भारत लाने की प्रक्रिया, देरी और परिवारों को होने वाली चुनौतियों के बारे में पूछा गया था।
प्रत्येक वर्ष लाए गए पार्थिव शरीरों के आंकड़ों की बात करें, तो 2016 में 4,167, 2017 में 4,222, 2018 में 4,205, 2019 में 5,291, 2020 में 5,321, 2021 में 5,834, 2022 में 5,946, 2023 में 6,532, 2024 में 7,096 और 2025 (अक्टूबर तक) 5,897 पार्थिव शरीरों को लाया गया है।
मंत्रालय के अनुसार, प्रत्येक भारतीय मिशन एक विस्तृत स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) के तहत काम करता है, जिसमें स्थानीय अधिकारियों से समन्वय, परिवार को सहायता और स्थानीय कानूनों के हिसाब से समय पर परिवहन की प्रक्रिया शामिल है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि कोई निश्चित समयसीमा तय नहीं की जा सकती, क्योंकि हर मामले में परिस्थितियां अलग होती हैं। प्राकृतिक मौत के मामलों में आमतौर पर 3 से 14 दिनों का समय लगता है, जबकि हत्या, दुर्घटना या अन्य अप्राकृतिक मृत्यु के मामलों में पुलिस जांच, पोस्टमॉर्टम और पहचान संबंधी प्रक्रियाओं के कारण देरी हो सकती है। कई मामलों में डीएनए परीक्षण भी जरूरी है।
परिवारों को आने वाली प्रमुख चुनौतियों में उच्च परिवहन लागत, स्थानीय पुलिस या मेडिकल रिपोर्ट में देरी और दस्तावेजों को लेकर असमंजस शामिल हैं। इन मुश्किलों को देखते हुए मिशनों को निर्देश दिया गया है कि ऐसे मामलों को शीर्ष प्राथमिकता पर निपटाया जाए और जरूरत पड़ने पर छुट्टियों में भी एनओसी जारी किए जाएं।
विदेशों में फंसे या आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की मदद के लिए इंडियन कम्युनिटी वेलफेयर फंड (आईसीडब्ल्यूएफ) का प्रावधान भी उपलब्ध है, जिसके माध्यम से परिवहन खर्च वहन करने में सहायता दी जाती है। विश्वभर में स्थित भारतीय मिशनों में पर्याप्त कांसुलर स्टाफ मौजूद हैं, जो स्थानीय प्रशासन और एयरलाइंस के साथ मिलकर पार्थिव शरीर को जल्द से जल्द भारत भेजने की प्रक्रिया पूरी करते हैं।

