चुने गए प्रतिनिधियों को हाउस अरेस्ट करना बेहद निंदनीय, गैर-लोकतांत्रिक और तानाशाही: मुद्दसिर हसन

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श्रीनगर, 28 दिसंबर (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर आम आदमी पार्टी ने चुने हुए प्रतिनिधि आगा रूहुल्लाह और वहीद-उर-रहमान पारा को हाउस अरेस्ट किए जाने की निंदा की और कहा कि जम्मू-कश्मीर के छात्रों और युवाओं का भविष्य, करियर और उम्मीदें दांव पर लगी हैं।

आप प्रवक्ता मुद्दसिर हसन ने कहा कि रिजर्वेशन पॉलिसी को सही ठहराने के पक्ष में आवाज उठाने के लिए लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए प्रतिनिधियों को हाउस अरेस्ट करना बेहद निंदनीय, गैर-लोकतांत्रिक और तानाशाही वाला कदम है। उन्होंने कहा कि रिजर्वेशन को सही ठहराना और निष्पक्षता की मांग करना न तो गैर-संवैधानिक है और न ही गैरकानूनी, बल्कि यह एक जायज लोकतांत्रिक मांग है।

मुद्दसिर हसन ने कहा, “मौजूदा सरकार जम्मू-कश्मीर के युवाओं के लिए पूरी तरह से विफल रही है। सरकार ने न तो युवाओं के लिए सही मौके बनाए हैं और न ही उन नीतियों पर सही बातचीत की अनुमति दी है, जो सीधे उनके भविष्य पर असर डालती हैं। रिजर्वेशन जैसे संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा, बहस और असहमति लोकतांत्रिक अधिकार हैं, अपराध नहीं।”

उन्होंने जोर देकर कहा कि रिजर्वेशन पॉलिसी को तार्किक बनाने की मांग का मकसद किसी भी समुदाय को नुकसान पहुंचाए बिना न्याय, संतुलन, पारदर्शिता और मेरिट की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने आगे कहा, “आप का पक्का मानना है कि रिजर्वेशन पॉलिसी निष्पक्ष, सोच-समझकर बनाई गई और सामाजिक रूप से सही होनी चाहिए, ताकि छात्रों का कोई भी वर्ग खुद को अलग-थलग या वंचित महसूस न करे।”

मुद्दसिर हसन ने साफ किया कि राजनीतिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन जब छात्रों और युवाओं के अधिकारों और भविष्य की बात आती है, तो आम आदमी पार्टी एकजुट और दृढ़ इरादे के साथ खड़ी है।

उन्होंने लगातार आवाजों को दबाने का जिक्र करते हुए कहा, “मेहराज मलिक की बस यही तथाकथित ‘गलती’ थी कि उन्होंने युवाओं और गरीबों के लिए आवाज उठाई, और उन पर पीएसए के तहत मामला दर्ज किया गया। आज यह साफ दिख रहा है कि एनसी और भाजपा एक ही स्क्रिप्ट पर काम कर रहे हैं और अन्याय पर सवाल उठाने वाली आवाजों को दबा रहे हैं। लोगों के दिए गए जनादेश का सम्मान नहीं किया गया है।”

मुद्दसिर हसन ने सरकार को जनएकता को कम आंकने के खिलाफ चेतावनी दी। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, “सरकार को किसी गलतफहमी में नहीं रहना चाहिए। जिस दिन छात्र, युवा और समाज के सभी वर्ग एकजुट होकर सड़कों पर उतर आएंगे, सरकार के लिए हालात संभालना बहुत मुश्किल हो जाएगा।”