दूषित पेयजल से मौतों का मामला मानवाधिकार आयोग पहुँचा, भागीरथपुरा घटना की जांच की मांग

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भोपाल : 01 जनवरी/ मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल आपूर्ति से हुई मौतों और गंभीर बीमारियों के मामले को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कराई गई है। बैतूल निवासी अधिवक्ता दीपक बुंदेले ने इस घटना को मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन बताते हुए आयोग से स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच तथा दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

शिकायत के अनुसार इंदौर नगर निगम की पेयजल पाइपलाइन में लीकेज के कारण सीवरेज और ड्रेनेज का गंदा पानी मिल गया, जिससे क्षेत्र की जल आपूर्ति दूषित हो गई। इसके परिणामस्वरूप भागीरथपुरा इलाके में उल्टी, दस्त और गंभीर निर्जलीकरण की समस्या तेजी से फैली। इस बीमारी की चपेट में आकर अब तक कई लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि सैकड़ों लोग विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं।

विभिन्न समाचार रिपोर्टों और स्थानीय निवासियों के हवाले से शिकायत में कहा गया है कि इस घटना में 8 से 10 लोगों की मौत होने का दावा किया जा रहा है, जिनमें महिलाएं और एक बच्चा भी शामिल हैं। वहीं प्रशासन ने 3 से 7 मौतों की पुष्टि की है। अनुमान के मुताबिक 1000 से अधिक लोग इस दूषित पानी से प्रभावित हुए हैं, जिनमें कई की हालत गंभीर बताई जा रही है।

शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि 25 दिसंबर 2025 के आसपास पानी में असामान्य गंध और स्वाद की शिकायतें सामने आई थीं, लेकिन समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिससे हालात बिगड़ते चले गए। अधिवक्ता दीपक बुंदेले ने इसे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त ‘जीवन के अधिकार’ का उल्लंघन बताया है। साथ ही उन्होंने संयुक्त राष्ट्र की सार्वभौम मानवाधिकार घोषणा के अनुच्छेद 3 और 25 का हवाला देते हुए कहा कि स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल प्रत्येक व्यक्ति के सम्मानजनक जीवन का मूल अधिकार है।

शिकायत में कहा गया है कि यह घटना राज्य प्रशासन और इंदौर नगर निगम की घोर लापरवाही को दर्शाती है और “भारत के सबसे स्वच्छ शहर” के रूप में पहचाने जाने वाले इंदौर की छवि पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।

मानवाधिकार आयोग से की गई शिकायत में मामले की स्वतंत्र जांच, दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, प्रभावित परिवारों को मुआवजा और बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के साथ-साथ भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए पेयजल आपूर्ति व्यवस्था की नियमित निगरानी और सुधार के निर्देश जारी करने की मांग की गई है।

अधिवक्ता दीपक बुंदेले ने उम्मीद जताई है कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग इस गंभीर मामले पर त्वरित संज्ञान लेते हुए पीड़ितों को न्याय दिलाने की दिशा में प्रभावी कदम उठाएगा।