Thursday, May 28, 2026
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पाकिस्तानी कोर्ट ने 12 मानवाधिकार के नेताओं और कार्यकर्ताओं को किया बरी

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क्वेटा, 6 जनवरी (आईएएनएस)। पाकिस्तान की एक अदालत ने मानवाधिकार संगठन बलूच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी) के उप आयोजक लाला अब्दुल वहाब बलूच और 11 दूसरे कार्यकर्ताओं को बरी कर दिया है। बीवाईसी ने अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ की गई कार्रवाई को राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित बताया था और अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों से हस्तक्षेप की मांग की थी। ऐसे में बीवाईसी ने कोर्ट के इस फैसले को कानूनी राहत बताया।

बीवाईसी के अनुसार, सोमवार को कराची सिटी कोर्ट के सिविल जज और ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट नईम अख्तर ने अभियोजन पक्ष के आरोपों को साबित करने में नाकाम रहने के बाद आरोपियों को बरी करने का आदेश दिया।

बरी किए गए लोगों में सरफराज बलूच, जैन बलूच, आफताब बलूच, काजी अमानुल्लाह, मुराद बलूच, वहीद बलूच, अहमद निसार, एहसान हमीद, साजिद बलूच, आमिर बलूच और अहसान फराज बलूच शामिल हैं। बीवाईसी ने आरोप लगाया कि उनके कई अन्य नेता अब भी जेल में बंद हैं।

बीवाईसी ने कहा, “न्यायपालिका अपने अधिकार का इस्तेमाल इस तरह से कर रही है जिससे ये नेता हिरासत में हैं। न्याय, लंबे समय तक जेल में रहने और राजनीतिक असहमति को दबाने के लिए कानूनी प्रक्रियाओं के इस्तेमाल को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो रही हैं।”

मानवाधिकार संस्था ने बताया कि 18 जनवरी, 2025 को पाकिस्तान पीनल कोड के तहत रजिस्टर हुआ यह केस लगभग एक साल से अंडर ट्रायल था। कोर्ट ने आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए अपना फैसला सुनाया।

बीवाईसी ने बताया कि उसके नेताओं और समर्थकों की गिरफ्तारियां पिछले साल बलूच यकजेहती कमेटी की ओर से 25 जनवरी, 2025 को ‘बलूच नरसंहार दिवस’ के तौर पर मनाई गई रैलियों की वजह से हुई थीं। इसके तहत बलूचिस्तान और कराची में, ल्यारी और शराफी गोथ, मालिर समेत पूरे बलूचिस्तान में प्रदर्शन हुए थे।

बीवाईसी ने कहा कि उसके नेताओं, महिलाओं और कार्यकर्ताओं पर हिंसा की गई और उन्हें मनगढ़ंत मामलों में हिरासत में लिया गया। संगठन ने कहा कि बीवाईसी नेताओं को शुरू में तीन महीने के लिए मेंटेनेंस ऑफ पब्लिक ऑर्डर (3-एमपीओ) के तहत हिरासत में रखा गया था। यह एक ऐसा कानून है जो सरकार के पब्लिक ऑर्डर के लिए संभावित खतरों के आकलन के आधार पर निवारक निरोध की इजाजत देता है।

हालांकि, बीवाईसी ने जिसे राजनीति से प्रेरित मामला बताया। संगठन ने आरोप लगाया कि बार-बार रिमांड पर लेने, जांच रिपोर्ट जमा करने में जानबूझकर देरी करने और सिस्टमैटिक प्रक्रियाओं में रुकावटों की वजह से उनकी कैद लंबी हो गई है।

मानवाधिकार संगठन ने कहा था कि पाकिस्तानी कोर्ट ने साफ तौर पर देखा है कि इन शिकायतों में ठोस आधार नहीं हैं और बीवाईसी नेताओं की गतिविधियां उनके संविधान अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार के अंदर आती हैं।