Monday, June 22, 2026
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दिल्ली विधानसभा में हंगामा: भाजपा ने स्पीकर से की आतिशी की शिकायत, कार्रवाई की मांग

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नई दिल्ली, 7 जनवरी (आईएएनएस)। दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और आम आदमी पार्टी की नेता आतिशी के कथित बयान ने राजनीति में भूचाल ला दिया है। भाजपा विधायक और दिल्ली सरकार में पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने आतिशी के बयान को लेकर दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता को पत्र लिखा है और उनके खिलाफ आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है।

दरअसल, आप नेता आतिशी का बयान गुरु तेग बहादुर के 350वें शहीदी साल के अवसर पर दिल्ली विधानसभा में हुई विशेष चर्चा से जुड़ा है। भाजपा ने आरोप लगाया है कि आतिशी ने सिखों के नौवें गुरु का अपमान किया है, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।

स्पीकर विजेंद्र गुप्ता को लिखे गए पत्र में कहा गया कि दिल्ली विधानसभा के सदन के अंदर मंगलवार को गुरु तेग बहादुर जी के महान शहादत के सम्मान के बारे में नियम 270 के अंतर्गत एक विशेष चर्चा चल रही थी और उसमें सत्ता पक्ष के सदस्य, मंत्री एवं मुख्यमंत्री भाग ले रहे थे। उस समय प्रतिपक्ष की नेत्री डॉ. आतिशी ने अपनी सीट से खड़ी होकर गुरु तेग बहादुर जी के बारे में जो वक्तव्य दिया, वह इतना अभद्र, शर्मनाक, और मर्यादाहीन था कि इसे हम लिखकर नहीं दे सकते हैं।

उन्होंने लिखा कि देश की आजादी से लेकर आज तक किसी भी सदन में किसी भी सदस्य के द्वारा किसी भी गुरु के संबंध में इस तरह की अभद्र, शर्मनाक, मर्यादाहीन भाषा का उपयोग नहीं किया गया है। इस मामले में डॉ. आतिशी के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए।

वहीं, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि मंगलवार को नेता प्रतिपक्ष आतिशी द्वारा सदन में श्री गुरु तेग बहादुर जी पर की गई अभद्र और अमर्यादित टिप्पणी से मैं आहत हूं और इसकी कड़ी निंदा करती हूं।

इस शर्मनाक और मर्यादाहीन टिप्पणी से सिख समाज के साथ-साथ देशवासियों की भावनाएं आहत हुई हैं।

उन्होंने कहा कि आज विधानसभा में साथी मंत्रियों, विधायकगणों, समाज के प्रबुद्धजनों और दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रतिनिधिमंडल ने मुझसे मुलाकात कर नेता प्रतिपक्ष के इस बयान पर कड़ी आपत्ति जताई और कार्रवाई की मांग की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं विधानसभा अध्यक्ष से आग्रह करती हूं कि इस मामले का संज्ञान लेते हुए न्यायोचित निर्णय लें और सदन की गरिमा, संवैधानिक मूल्यों एवं जनभावनाओं का सम्मान करते हुए उचित कार्रवाई की जाए।