बैतूल : 15 जनवरी/ मध्य प्रदेश के बैतूल ज़िले की भैंसदेही तहसील स्थित धाबा गांव में आदिवासी क्षेत्र के बच्चों के लिए बन रहे एक निजी स्कूल भवन के हिस्से को प्रशासन द्वारा गिराए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस कार्रवाई को लेकर अधिवक्ता दीपक बुंदेले ने मुख्यमंत्री को शिकायत पत्र भेजकर इसे संविधान की पाँचवीं अनुसूची और PESA कानून का गंभीर उल्लंघन बताया है।
शिकायत के अनुसार, धाबा गांव में श्री अब्दुल नईम द्वारा अपनी निजी भूमि पर लगभग 20 लाख रुपये की लागत से नर्सरी से कक्षा 8वीं तक के बच्चों के लिए एक निजी स्कूल भवन का निर्माण कराया जा रहा था। यह निर्माण गांववासियों की सहमति से किया जा रहा था और पंचायत द्वारा इसके लिए NOC भी जारी की जा चुकी थी। उद्देश्य आदिवासी क्षेत्र में शिक्षा की भारी कमी को दूर करना था।
पत्र में बताया गया है कि 12 जनवरी 2026 को पंचायत से अनापत्ति प्रमाण पत्र मिलने के बावजूद, 13 जनवरी को प्रशासन ने JCB मशीन लगाकर स्कूल भवन के एक हिस्से और सामने बने शेड को गिरा दिया। खास बात यह रही कि जिस समय यह कार्रवाई की गई, उस दौरान गांव के कई लोग कलेक्टर कार्यालय में अपनी बात रखने गए हुए थे।
प्रशासन की ओर से इस कार्रवाई को “अवैध निर्माण” और कुछ अफवाहों – जैसे कि यहां अवैध मदरसा संचालित होने – के आधार पर बताया गया। हालांकि शिकायत में स्पष्ट किया गया है कि जांच में किसी भी प्रकार का मदरसा नहीं पाया गया और निर्माण पूरी तरह स्कूल के उद्देश्य से किया जा रहा था।
अधिवक्ता दीपक बुंदेले ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि बैतूल जिला अनुसूचित क्षेत्र में आता है, जहां संविधान की पाँचवीं अनुसूची और PESA अधिनियम 1996 लागू होते हैं। इन कानूनों के अनुसार, अनुसूचित क्षेत्रों में भूमि, निर्माण या विकास से जुड़े किसी भी निर्णय में ग्राम सभा की पूर्व सहमति अनिवार्य होती है।
शिकायत में कहा गया है कि इस मामले में न केवल ग्राम सभा और सरपंच की सहमति थी, बल्कि पंचायत की ओर से औपचारिक अनुमति भी दी गई थी। इसके बावजूद ग्राम सभा की राय सुने बिना की गई बुलडोज़र कार्रवाई को कानून और संविधान की भावना के विरुद्ध बताया गया है।
पत्र में यह भी कहा गया है कि पाँचवीं अनुसूची का मुख्य उद्देश्य अनुसूचित जनजातियों के शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास के अधिकारों की रक्षा करना है। राज्य में पहले ही सैकड़ों स्कूल भवनविहीन या जर्जर हालत में चल रहे हैं। ऐसे में निजी संसाधनों से स्कूल निर्माण को तोड़ना आदिवासी बच्चों के शिक्षा के अधिकार पर सीधा प्रहार माना जा रहा है।
अधिवक्ता ने प्रशासनिक कार्रवाई को अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता) का उल्लंघन बताया है। शिकायत में कहा गया है कि बिना नोटिस, बिना सुनवाई और केवल अफवाहों के आधार पर की गई यह कार्रवाई “प्रक्रियागत उचितता” के सिद्धांतों के खिलाफ है।
मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में मांग की गई है कि, पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए. गिराए गए स्कूल भवन के हिस्से के पुनर्निर्माण की अनुमति दी जाए और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो.


