Friday, June 12, 2026
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एआर रहमान के ‘कम्युनल’ वाले बयान पर राजनीति तेज, रामदास आठवले ने इसे बताया ‘सफेद झूठ’

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दिल्ली, 16 जनवरी (आईएएनएस)। ऑस्कर अवॉर्ड विजेता और संगीतकार ए. आर. रहमान ने हिंदी सिनेमा में काम न मिलने की बात को उजागर किया है। संगीतकार का कहना है कि उसके पीछे की वजह हिंदी सिनेमा में बढ़ता कम्युनलिज्म है। सिंगर के इस बयान पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी आनी शुरू हो चुकी हैं।

दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग ने सिंगर के बयान का समर्थन किया है, लेकिन वहीं भाजपा के नेताओं और केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने बयान को सफेद झूठ बताया है।

रामदास अठावले ने कहा, “मेरा मानना ​​है कि ए. आर. रहमान के आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है, क्योंकि फिल्म उद्योग में मुस्लिम समुदाय के कई कलाकार हैं, जिनमें सलमान खान, शाहरुख खान और आमिर खान शामिल हैं, जिन्हें मराठी भाषी और पूरे देश के भारतीय पसंद करते हैं। हां, ये हो सकता है कि हिंदी सिनेमा के संगीत के क्षेत्र में कई नए कलाकार आ रहे हैं और यही वजह है कि उन्हें काम कम मिल रहा है। हिंदी सिनेमा में जातिवाद जैसी कोई चीज नहीं है, यह सिर्फ एक झूठ है”

पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग ने कहा, “हां, कई मुसलमानों को उनके धर्म के कारण काम नहीं मिलता। इसमें कोई शक नहीं है और इसे छिपाया नहीं जाना चाहिए। इसीलिए हम इस मुद्दे को सुलझाने के लिए काम कर रहे हैं। किसी को तो ये बात सामने से करनी थी और सब समस्याओं को सामने बैठकर सुलझाना चाहिए।”

भाजपा विधायक जितेंद्र कुमार गोठवाल ने कहा, “हालांकि यह फिल्म उद्योग से जुड़ा मुद्दा है, लेकिन मुझे लगता है कि मौजूदा हालात में उद्योग में पारदर्शिता से काम हो रहा है। पहले लोगों को कुछ नेताओं की सिफारिशों के आधार पर काम मिलता था, लेकिन आज हुनर, कला और उनकी मेहनत को देखते हुए काम दिया जा रहा है। पारदर्शिता आने के बाद काम मिलने में कई लोगों को परेशानी होगी और मुझे लगता है कि ए.आर. रहमान को भी इसी बात की पीड़ा है।”

भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष सैयद भाषा ने कहा, “ए.आर. रहमान ने कहा है कि उन्हें भाजपा सरकार के तहत अवसर नहीं मिले हैं, लेकिन यह गलत है। 1992 से उन्होंने ‘स्लमडॉग मिलियनेयर,’ ‘दिल से,’ और ‘मद्रास कैफे’ जैसी कई बड़ी हिट फिल्में दी हैं और 2025 का राष्ट्रीय पुरस्कार जैसे अवार्ड पूरी तरह से अपनी प्रतिभा के दम पर जीते हैं। फिल्मों में अवसर परियोजना की सफलता पर निर्भर करते हैं, न कि सत्ताधारी पार्टी पर। रहमान की प्रतिभा यह सुनिश्चित करती है कि जब तक वे बेहतरीन संगीत बनाते रहेंगे, उन्हें पहचान मिलती रहेगी।”

उन्होंने आगे कहा कि शाहरुख खान को फिल्म जवान के लिए नेशनल बेस्ट एक्टर अवॉर्ड मिला था, क्योंकि उनकी फिल्म अच्छी थी। ऐसा नहीं है कि सत्ताधारी पार्टियों का हस्तक्षेप हिंदी सिनेमा के अंदर होता है, ये सरासर झूठ है।