बसंत पंचमी पर मूकजनों की देवी मां मूकाम्बिका देती हैं ज्ञान का आशीर्वाद, भय से भी मिलता है छुटकारा

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नई दिल्ली, 19 जनवरी (आईएएनएस)। दक्षिण भारत में ज्ञान की देवी मां सरस्वती को समर्पित सबसे ज्यादा पवित्र तीर्थ स्थल मौजूद हैं। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि ज्ञान का पहला सोता दक्षिण भारत के अलग-अलग राज्यों से ही बहा होगा।

बसंत पंचमी के मौके पर हम कर्नाटक के ऐसे मंदिर की जानकारी लेकर आए, जहां मां मूकाम्बिका देवी मूकजनों की देवी के रूप में विराजमान हैं। बसंत पंचमी के मौके पर मंदिर में बच्चे से जुड़े कई बड़े अनुष्ठान होते हैं।

कर्नाटक के 80 किलोमीटर की दूरी पर कोल्लूर नामक एक छोटा कस्बा है, जहां प्रसिद्ध मूकाम्बिका देवी मंदिर स्थित है। यह मंदिर कर्नाटक के सात मुक्ति स्थलों में से एक है। मंदिर में विराजमान मां मूकाम्बिका देवी, मां पार्वती, मां लक्ष्मी और मां सरस्वती का स्वरूप हैं। गर्भगृह में मां मूकाम्बिका बैठी हुई मुद्रा में विराजमान हैं, जिनके हाथों में चक्र और शंख हैं। मां की प्रतिमा ज्ञान, साहस और शांति का प्रतीक है। माना जाता है कि दर्शन से भय, बीमारी और अज्ञान से मुक्ति मिलती है।

खास बात ये है कि वर्तमान में मां की पूजा प्रतिमा के रूप में की जा रही है। आदि शंकराचार्य ने मां मूकाम्बिका देवी की तपस्या कर उनकी प्रतिमा को स्थापित किया था। मंदिर में मां की प्रतिमा और शिवलिंग दोनों विराजमान हैं। बसंत पंचमी के दिन मां मूकाम्बिका के मंदिर में खास पूजा का आयोजन होता है।

ज्ञान, बुद्धि और वाणी की देवी मूकाम्बिका को प्रसन्न करने के लिए कई अनुष्ठान किए जाते हैं। माना जाता है कि अगर मूक बच्चों को मां मूकाम्बिका देवी के दर्शन कराए जाते हैं तो उनकी बुद्धि और बल दोनों में वृद्धि होती है। मां की प्रतिमा के पास एक दीया भी जलता है, जो कभी नहीं बुझता। किसी को नहीं पता है कि दीया का रखरखाव कौन करता है। हालांकि, दीया के पास जाने की इजाजत किसी को नहीं है।

मूकाम्बिका देवी सुपर्णिका नदी के किनारे बसा है, जिसे जीवनदायिनी नदी कहा जाता है। मां मूकाम्बिका के आशीर्वाद से ही नदी में स्नान करने से भक्तों के शारीरिक और मानसिक कष्ट दूर होते हैं। बसंत पंचमी के लिए भक्त भारी संख्या में मंदिर पहुंचते हैं और सुपर्णिका नदी में भी स्नान करते हैं। बसंत पंचमी के अलावा, शारदीय नवरात्र और मार्च में होने वाले ब्रह्म रथोत्सव में भक्तों की भारी भीड़ मंदिर पहुंचती है।