गुवाहाटी, 19 जनवरी (आईएएनएस)। असम के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान और टाइगर रिजर्व में एक सप्ताह से भी कम समय में दूसरे बाघ की मौत की पुष्टि हुई है। अधिकारियों ने सोमवार को बताया कि इससे पहले जहां एक नर बाघ का शव मिला था, वहीं अब एक मादा बाघ मृत पाई गई है।
काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान और टाइगर रिजर्व के अधिकारियों के अनुसार, लगभग तीन से चार साल उम्र की एक बाघिन का शव रविवार को बागोरी पश्चिमी रेंज के काठपोरा इलाके से बरामद किया गया। शव मिलने की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और आवश्यक कार्रवाई शुरू की।
इसके बाद काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान की निदेशक सोनाली घोष ने एक विशेष समिति का गठन किया। इस समिति को पोस्टमार्टम कराने और राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण द्वारा तय मानक संचालन प्रक्रिया के अनुसार शव के सुरक्षित निपटारे की जिम्मेदारी सौंपी गई। प्रारंभिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि बाघिन की मौत आपसी लड़ाई के कारण हुई थी।
इससे पहले 14 जनवरी को काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान और टाइगर रिजर्व के बिश्वनाथ वन्यजीव प्रभाग के अंतर्गत पूर्वी रेंज के गमिरी इलाके स्थित थुटे चापोरी क्षेत्र में एक युवा नर रॉयल बंगाल टाइगर का शव मिला था। उस बाघ की उम्र लगभग दो से तीन साल बताई गई थी।
वन अधिकारियों ने कहा कि उस समय गोपालजारानी एंटी-पोचिंग कैंप के कर्मचारियों ने नियमित गश्त के दौरान बाघ का शव देखा। सूचना मिलते ही वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया गया और तुरंत आवश्यक कदम उठाए गए। उस मामले में भी काजीरंगा की निदेशक ने राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों के तहत पोस्टमार्टम और शव के निपटारे की निगरानी के लिए एक समिति गठित की थी।
अधिकारियों ने बताया कि दोनों मामलों में किसी भी तरह के शिकार के संकेत नहीं मिले हैं। वन विभाग पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है और क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी गई है। लगातार दो बाघों की मौत के बाद पार्क प्रशासन सतर्क हो गया है और वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त कदम उठाए जा रहे हैं।
शुरुआती पशु चिकित्सा जांच में यह संकेत मिला है कि बाघ की मौत प्राकृतिक कारणों से या फिर आपसी लड़ाई के चलते हुई हो सकती है। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारण की पुष्टि हो पाएगी।
नवीनतम सरकारी आंकड़ों के अनुसार, काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में वर्ष 2022 की गणना के आधार पर 2,613 एक सींग वाले गैंडे पाए गए हैं। इसी वर्ष की गणना में यहां 104 बंगाल टाइगर दर्ज किए गए थे। इसके अलावा वर्ष 2024 में की गई गणना के अनुसार पार्क में 1,228 एशियाई हाथी मौजूद हैं। वर्ष 2022 की जनगणना में 2,565 जंगली भैंस और 1,129 पूर्वी दलदली हिरण पाए गए थे।
काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान और टाइगर रिजर्व असम के गोलाघाट, नागांव, सोनितपुर और बिश्वनाथ जिलों में फैले हुए हैं। यह पार्क न केवल जैव विविधता के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, बल्कि पर्यटन के माध्यम से राज्य की अर्थव्यवस्था में भी बड़ा योगदान देता है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024-25 में पार्क ने 10.90 करोड़ रुपए से अधिक का राजस्व अर्जित किया है, जबकि 2023-24 में यह आंकड़ा 8.81 करोड़ रुपए से अधिक था।
काजीरंगा टाइगर रिजर्व में तीन वन प्रभाग शामिल हैं। इनमें पूर्वी असम वन्यजीव प्रभाग, जिसका मुख्यालय बोकाखाट में है, बिश्वनाथ वन्यजीव प्रभाग, जिसका मुख्यालय बिश्वनाथ चरियाली में स्थित है, और नागांव वन्यजीव प्रभाग, जिसका मुख्यालय नागांव में है।
इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना की आधारशिला रखी। लगभग 6,950 करोड़ रुपए की इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्देश्य काजीरंगा क्षेत्र में वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना, राष्ट्रीय राजमार्ग-715 पर सड़क हादसों को कम करना, इको-टूरिज्म को बढ़ावा देना और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करना है।
यह परियोजना राष्ट्रीय राजमार्ग-715 के कालियाबोर से नुमालीगढ़ खंड को चार लेन का बनाने का हिस्सा है। इसके तहत करीब 34.45 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड और वन्यजीव-अनुकूल कॉरिडोर बनाया जाएगा, साथ ही जाखलाबांधा और बोकाखाट में बाईपास का निर्माण भी प्रस्तावित है। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर प्रस्तावित एलिवेटेड कॉरिडोर के मॉडल का भी अवलोकन किया।

