सभी स्थानीय निकाय चुनावों को एक साथ कराने पर विचार कर रही कर्नाटक सरकार: डीके शिवकुमार

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बेंगलुरु, 19 जनवरी (आईएएनएस)। कर्नाटक सरकार ने कहा कि वह बेंगलुरु में होने वाले नगर निगम चुनावों सहित सभी स्थानीय निकाय चुनावों को एक साथ कराने पर विचार कर रही है।

उपमुख्यमंत्री और राज्य कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने सोमवार को मीडिया से बातचीत के दौरान यह बयान दिया।

ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (जीबीए) चुनावों के संबंध में मतदाताओं की मसौदा सूची सोमवार को जारी की गई।

शिवकुमार ने नगरपालिका चुनाव के सवाल पर कहा, “अदालत ने अपने निर्देश जारी कर दिए हैं। हमारी सरकार 73वें और 74वें संवैधानिक संशोधनों के प्रति प्रतिबद्ध है। युवाओं को सत्ता सौंपी जानी चाहिए और नई पीढ़ी को नेतृत्व में आना चाहिए।”

वर्तमान में बेंगलुरु में पांच नगर निगमों से 369 वार्ड बनाए गए हैं।

बेंगलुरु के बाहरी इलाकों को नगरपालिका क्षेत्र के अंतर्गत लाने पर भी चर्चा चल रही है।

शिवकुमार ने कहा, “हमारी सरकार ने जिला और तालुक पंचायत चुनाव कराने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री और मंत्रियों ने कहा है कि इन चुनावों से जुड़े आरक्षण संबंधी मुद्दों का समाधान किया जाएगा। कई लोगों ने सुझाव दिया है कि ग्राम पंचायत चुनाव भी पार्टी चिन्हों पर कराए जाने चाहिए, लेकिन इस पर अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है। इन सभी चुनावों को एक साथ कराने पर विचार किया जा रहा है।”

स्थानीय निकाय चुनावों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के बजाय मतपत्रों के इस्तेमाल के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, “मुझे भी इस संबंध में जानकारी मिली है। यह मामला राज्य चुनाव आयोग के अंतर्गत आता है। मतपत्रों का इस्तेमाल करने में कोई बुराई नहीं है। चुनाव के तरीके से ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि मतदान हो।”

डिप्‍टी सीएम ने कहा, “मतदाताओं की मसौदा सूची जारी कर दी गई है और हमने बूथ स्तरीय एजेंटों (बीएलए) के साथ व्यवस्था कर ली है। यदि किसी मतदाता का नाम सूची में छूट गया है तो उन्हें दूसरा मौका दिया जाना चाहिए और उनके अधिकार की रक्षा की जानी चाहिए। हम अधिकारियों के कामकाज में हस्तक्षेप नहीं करेंगे। चुनाव आयोग मौजूदा कानूनी ढांचे के भीतर ही काम करेगा।

जब उनसे पूछा गया कि क्या केंद्रीय चुनाव आयोग पर अविश्वास के कारण मतपत्रों का इस्तेमाल किया जा रहा है तो उन्होंने कहा, “चुनाव कराने वाले हम कौन होते हैं? चुनाव तो चुनाव आयोग ही कराता है। राज्य चुनाव आयोग हमारी सरकार के नियंत्रण में नहीं आता। वह अपने हिसाब से तय करेगा कि क्या करना है।”