भोपाल, 28 जनवरी (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश में फूलों की खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है और उसी का नतीजा है कि वह देश का प्रमुख पुष्प उत्पादक राज्य बन गया है। राज्य में फूलों की खेती लगातार बढ़ रही है। आंकड़ों पर गौर करें तो प्रदेश में 43 हजार 611 हेक्टेयर क्षेत्र में फूलों की खेती की जा रही है।
प्रदेश में पुष्प उत्पादन में इंदौर जिला प्रथम स्थान पर है। इंदौर जिले में चार हजार 826 हेक्टेयर क्षेत्र में फूलों की खेती की जा रही है। रतलाम द्वितीय स्थान पर है। इसमें 4 हजार 511 हेक्टेयर में फूलों की खेती की जा रही है तथा तृतीय स्थान उज्जैन जिले का है। इसमें 3 हजार 670 हेक्टेयर क्षेत्र में पुष्प उत्पादन किया जा रहा है।
प्रदेश के लघु-सीमांत किसानों की आय को दोगुना करने में उद्यानिकी फसलों में फूलों की बड़ी भूमिका है। राज्य शासन का प्रयास भी फूलों के उत्पादन को व्यावसायिक स्वरूप प्रदान करना है। मध्य प्रदेश में मुख्य रूप से गुलाब, गेंदा, रजनीगंधा, जरबेरा, लिली, कार्नेशन एवं आर्किड फूलों का उत्पादन किया जा रहा है। प्रदेश में चौथे स्थान पर सतना जिले में 2 हजार 541 हेक्टेयर तथा पांचवें स्थान पर छिंदवाड़ा जिले में 2 हजार 44 हेक्टेयर में फूलों की खेती की जा रही है।
प्रदेश में फूलों का औसत उत्पादन 11.19 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। फूलों की किस्मों के आधार पर इंदौर गुलाब उत्पादन में, रतलाम गेंदा उत्पादन में, उज्जैन सेवंती उत्पादन में तथा सिंगरौली ग्लेदुलास के उत्पादन में प्रथम स्थान पर है।
उद्यानिकी के जानकारों की मानें तो फूलों की खेती में लागत अन्य उत्पादो के मुकाबले कम है और इस पर रोग भी ज्यादा असर नहीं करते। इतना ही नहीं फूलों के त्योहारों के समय में अच्छे दाम भी मिलते है। कुल मिलाकर फूलों की खेती फायदे की है।

