नई दिल्ली, 28 जनवरी (आईएएनएस)। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने बद्रीनाथ-केदारनाथ में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने के बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के फैसले पर कहा कि इससे सनातन को कोई लाभ नहीं होगा।
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा कि भाजपा के पास बताने के लिए कुछ नहीं है। चुनाव आते ही वे नर्वस हो जाते हैं। इस तरह के कदम उठाए जा रहे हैं, क्योंकि उनके पास कोई जवाब नहीं है। प्रदेश में पलायन क्यों हो रहा है? बेरोजगारी क्यों बढ़ रही है? महंगाई क्यों बढ़ रही है? महिलाओं के प्रति अपराध क्यों बढ़ रहे हैं? इन बातों का कोई जवाब नहीं है। जो कदम उठाए जा रहे हैं, उससे सनातन को कोई लाभ नहीं होने वाला है।
बारामती प्लेन क्रैश में महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार की मौत पर हरीश रावत ने कहा कि यह बहुत दुखद है, बहुत दुखद है। भले ही हम राजनीतिक रूप से उनसे दूर थे, लेकिन महाराष्ट्र ने एक काबिल नेता खो दिया, एक अच्छी और बड़ी संभावना खो दी। बहुत दुखद परिस्थिति में उनकी मौत हुई है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और सांसद पप्पू यादव के बयान पर उन्होंने कहा कि हादसे की पूरी जांच होनी चाहिए। इतना बड़ा आदमी हम लोगों ने खो दिया, कुछ चीजें ऐसी लगती हैं तो जांच जरूरी है।
यूजीसी के नए नियमों को लेकर चल रहे विरोध पर हरीश रावत ने कहा कि देखिए, आम तौर पर इसमें ऐसी कोई बात नहीं है, लेकिन अब सरकार का एजेंडा बांटने वाला हो गया है। वह समाज को बांटने वाले बन गए हैं। कोई भी कदम उठाते हैं तो सामाजिक समन्वय का ध्यान नहीं रखा जाता, इसीलिए विरोध हो रहा है। सभी को सुरक्षा मिलनी चाहिए। जो लोग पीड़ित हो रहे हैं, उन्हें निश्चित रूप से सुरक्षा मिलनी चाहिए, क्योंकि यह एक गलत तरीका है। अगर किसी को जाति, धर्म, जन्म, लिंग या दिव्यांगता के आधार पर परेशान किया जाता है तो उन्हें सुरक्षा मिलनी चाहिए।

