नई दिल्ली, 29 जनवरी (आईएएनएस)। 30 जनवरी सिर्फ एक तारीख नहीं है। यह दिन देश के लिए एक बड़ी क्षति की याद दिलाता है। इसी दिन वर्ष 1948 में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की हत्या कर दी गई थी। यह घटना देश के लिए एक ऐसा आघात थी, जिसने केवल भारतीय समाज ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया। गांधीजी का बलिदान न केवल उनके अनुयायियों के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए पीड़ा का कारण बना। इस दिन को अब हर साल शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है।
महात्मा गांधी ने सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलते हुए देश को स्वतंत्रता दिलाने में अहम भूमिका निभाई। उनका जीवन अपने आप में प्रेरणा का स्रोत था, और उनकी हत्या केवल एक व्यक्ति की हत्या नहीं थी, बल्कि मानवीय मूल्यों, शांति और न्याय पर हमला थी। यही कारण है कि 30 जनवरी को राष्ट्रीय शोक और स्मरण दिवस के रूप में मनाया जाता है, लेकिन शहीद दिवस मनाने का उद्देश्य केवल महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देना नहीं है, बल्कि उन सभी वीरों को भी याद करने का दिन है जिन्होंने देश की आजादी, एकता और अखंडता के लिए अपने प्राणों की आहुति दी।
30 जनवरी 1948 को नई दिल्ली के बिड़ला भवन में प्रार्थना सभा के दौरान नाथूराम गोडसे ने महात्मा गांधी को गोली मार दी। यह दुखद घटना पूरे देश और दुनिया के लिए एक चेतावनी थी कि अहिंसा और सत्य के मार्ग पर चलना आसान नहीं होता, लेकिन यही मार्ग सबसे कठिन होते हुए भी सबसे शक्तिशाली है। गांधीजी के बलिदान ने हमें यह समझाया कि स्वतंत्रता और न्याय केवल अधिकार नहीं, बल्कि उन वीरों के बलिदान की देन है जिन्होंने इसे सुनिश्चित किया।
शहीद दिवस हमें याद दिलाता है कि आज हम जो स्वतंत्र हवा में सांस ले रहे हैं, वह कई वीरों के बलिदान का परिणाम है। यह दिन प्रत्येक भारतीय को अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों के प्रति सजग बनने की प्रेरणा देता है। देशभर में इस अवसर पर दो मिनट का मौन रखा जाता है, ताकि हम शहीदों के साहस और त्याग को याद कर सकें। इसके साथ ही, राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री राजघाट पर जाकर महात्मा गांधी और अन्य शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।
विद्यालयों, कॉलेजों और सरकारी संस्थानों में भी शहीद दिवस के अवसर पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। भाषण, देशभक्ति गीत और शहीदों की कहानियों के माध्यम से युवा पीढ़ी को उनके अदम्य साहस और त्याग के बारे में बताया जाता है। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य केवल इतिहास के बारे में जानने तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभक्ति, नैतिकता और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को जीवित रखना है। यह हमें सिखाता है कि स्वतंत्रता केवल अधिकार नहीं है, बल्कि कर्तव्य और जिम्मेदारी का भी नाम है।

