नई दिल्ली, 1 फरवरी (आईएएनएस)। यूनियन बजट 2026-27 को लेकर केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए इस बजट को युवाओं पर केंद्रित और पर्यावरण व आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाने वाला बताया है। उन्होंने कहा कि यह बजट इकोलॉजिकल बैलेंस के साथ इकोनॉमिक ग्रोथ को आगे बढ़ाते हुए एक विकसित भारत की दिशा में मजबूत कदम है।
केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने इस बात पर जोर दिया कि यह बजट 2047 तक प्रधानमंत्री मोदी के विकसित भारत के विजन के अनुसार तेजी से बढ़ती इकोनॉमी में पर्यावरण के हिसाब से मजबूत इकोलॉजिकल ग्रोथ के विजन को पूरा करने के लिए एक मजबूत नींव रखता है। यह बजट सही मायने में भारत के हर नागरिक के सुरक्षित और खुशहाल भविष्य के सपनों और उम्मीदों को दिखाता है। उन्होंने कहा कि यह गरीबों, किसानों, युवाओं, महिलाओं, मध्यम वर्ग और उद्यमियों के सशक्तीकरण की दिशा में एक साफ रास्ता दिखाता है, जिससे यह लोगों का बजट बन जाता है।
मंत्री ने बताया कि बजट में पर्यावरण संरक्षण और संरक्षण के साथ-साथ वैश्विक जैव विविधता और प्राकृतिक समृद्धि की सुरक्षा से जुड़े कई जरूरी कदम भी शामिल हैं, जैसे कि इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस का गठन और भारत में पहली बार ग्लोबल बिग कैट समिट का आयोजन शामिल है। इन पहलों के जरिए वन्यजीव संरक्षण और जैव विविधता के प्रति वैश्विक सहयोग को मजबूत किया जाएगा।
नेचर-बेस्ड टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए बजट में विशेष जोर दिया गया है। ओडिशा, कर्नाटक और केरल में कछुओं के घोंसले वाले क्षेत्रों में विशेष ‘टर्टल ट्रेल्स’ विकसित किए जाएंगे। इसके साथ ही पुलिकट झील के आसपास नए बर्ड-वॉचिंग ट्रेल्स बनाए जाएंगे। मंत्री ने कहा कि इन पहलों से न केवल लोगों में प्रकृति और वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ेगी, बल्कि प्राकृतिक परिदृश्य और समृद्ध जैव विविधता के प्रति गर्व और जिम्मेदारी की भावना भी विकसित होगी।
रेयर-अर्थ कॉरिडोर को लेकर भूपेंद्र यादव ने कहा कि रेयर अर्थ एलिमेंट्स की सस्टेनेबल माइनिंग और मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में समर्पित कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे। इसका उद्देश्य इन महत्वपूर्ण संसाधनों के लिए आयात पर निर्भरता कम करना है। इसके अलावा दालों—तूर, उड़द और मसूर—के लिए क्लाइमेट-रेसिलिएंट बीज विकसित करने हेतु छह साल के विशेष मिशन की घोषणा की गई है, जिससे कृषि की स्थिरता और किसानों की आय को मजबूती मिलेगी।
बजट में फिशरीज वैल्यू चेन को मजबूत करने के लिए 500 जलाशयों के इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट की पहल भी शामिल है। इसके अलावा, सस्टेनेबल और क्लाइमेट-रेसिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर सहित प्रैक्टिकल शहरी प्रोजेक्ट्स के लिए फाइनेंसिंग देने के लिए 1 लाख करोड़ रुपए के अर्बन चैलेंज फंड की घोषणा की गई है। उन्होंने आगे कहा कि डीकार्बोनाइजेशन को बढ़ावा देने के लिए, कार्बन कैप्चर, यूटिलाइजेशन और स्टोरेज (सीसीयूएस) टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देने के लिए अगले पांच सालों में 20,000 करोड़ रुपए का प्रोविजन किया गया है, जो पेरिस एग्रीमेंट के तहत जीएसीजी एमिशन को कम करने की जिम्मेदारियों को पूरा करने के प्रति भारत के कमिटमेंट को दिखाता है।
यादव ने बताया कि ईवी बैटरी के लिए घरेलू इकोसिस्टम बनाने पर फोकस करने के लिए नेशनल मैन्युफैक्चरिंग मिशन को बढ़ाया गया है-यह ग्रीन मोबिलिटी, सोलर पीवी सेल, इलेक्ट्रोलाइजर और विंड टर्बाइन की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि अगले पांच सालों में, 20 नए नेशनल वॉटरवे चालू किए जाएंगे, जिससे लॉजिस्टिक्स के कार्बन फुटप्रिंट को कम करने में मदद मिलेगी। यह भी इको-फ्रेंडली ट्रांसपोर्ट की दिशा में एक बड़ा कदम है।
यादव ने कहा कि ये सभी कदम, ‘प्रकृति’ और ‘प्रगति’ के बीच बैलेंस बनाने के लिए पहले उठाए गए कदमों के साथ मिलकर, भारत को उन चुनिंदा देशों में पहुंचा देंगे जहां डेवलपमेंट पर्यावरण और बायोडायवर्सिटी की कीमत पर नहीं, बल्कि हमारी समृद्ध बायोडायवर्सिटी और इकोलॉजी को बढ़ावा देकर और उसकी रक्षा करके होता है।

