Thursday, July 30, 2026
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राज्यसभाः स्वतंत्र स्पेस फोर्स बनाने की मांग, रणनीतिक आर्थिक मोर्चो के लिए महत्वपूर्ण

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नई दिल्ली, 9 फरवरी (आईएएनएस)। सोमवार को राज्यसभा में स्पेस फोर्स का विषय उठाया गया। सदन में कहा गया कि भारत को अपनी एक स्वतंत्र स्पेस फोर्स का गठन करना चाहिए। सदन को बताया गया कि स्पेस आज देश की सुरक्षा से सीधे जुड़ा है। यह डोमेन रणनीतिक आर्थिक व सैन्य ऑपरेशन को भी प्रभावित करता है।

राज्यसभा में ओडिशा से भाजपा सांसद सुजीत कुमार ने यह विषय उठाया। उन्होंने कहा कि अब अंतरिक्ष सिर्फ साइंस का विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह देश की सुरक्षा से सीधे जुड़ा रणनीतिक क्षेत्र बन चुका है। उन्होंने सरकार से स्वतंत्र स्पेस फोर्स बनाने पर गंभीरता से विचार करने की अपील की।

उन्होंने राज्यसभा में कहा, “या तो हम उस खामोश हमले का इंतजार करें जो हमारी अर्थव्यवस्था को ठप कर दे, या फिर पहले से ऐसी ताकत खड़ी करें कि ऐसा हमला हो ही न सके। स्पेस फोर्स हमें सितारों में जंग जीतने के लिए नहीं, बल्कि जमीन पर जंग हारने से बचाने के लिए चाहिए।”

राज्यसभा सांसद ने सरकार से मांग की कि इस विषय पर एक उच्चस्तरीय समिति बनाई जाए, जो स्पेस फोर्स और स्पेस वॉरफेयर अकादमी पर विचार कर जल्द अपनी रिपोर्ट दे। सुजीत कुमार ने सदन में कहा कि आज हमारी कॉल, इंटरनेट, जीपीएस, बैंकिंग, निगरानी और सैन्य ऑपरेशन सब कुछ अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट्स पर टिका है। अगर दुश्मन ने अंतरिक्ष में जरा-सी भी गड़बड़ी कर दी, तो जमीन पर देश की सुरक्षा और व्यवस्था दोनों प्रभावित हो सकती हैं।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार के कदमों का जिक्र करते हुए कहा कि वर्ष 2019 में डिफेंस स्पेस एजेंसी और डिफेंस स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन बनाई गईं। साथ ही एंटी-सैटेलाइट मिसाइल टेस्ट की सफलता ने भारत को दुनिया के सामने एक मजबूत स्पेस पावर के रूप में खड़ा कर दिया है। लेकिन उन्होंने साफ कहा कि अब इतना काफी नहीं है। आज के दौर में अलग से स्पेस फोर्स बनाना वक्त की जरूरत है।

उन्होंने बताया कि चीन के पास पहले से अपनी खास स्पेस से जुड़ी सैन्य ताकत है और अमेरिका ने 2019 में स्पेस फोर्स बना ली। ऐसे में भारत ढिलाई नहीं बरत सकता। सुजीत कुमार ने कहा कि मौजूदा डिफेंस स्पेस एजेंसी एक अच्छी शुरुआत है, लेकिन अभी यह अस्थायी ढांचे में काम कर रही है। इसके पास न तो अपना अलग कैडर है, न पूरी कमान और न ही स्थायी व्यवस्था।

उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले समय में भारत के कई नए सैन्य सैटेलाइट अंतरिक्ष में होंगे। ऐसे में उनकी सुरक्षा के लिए चौबीसों घंटे समर्पित रहने वाली सैन्य निगरानी और ऑपरेशन जरूरी होंगे। उनका कहना था कि पारंपरिक सैन्य कमांड अकेले यह नहीं संभाल सकते।

–आईएएनएस

जीसीबी/एएस