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जनवरी में 800 से अधिक कथित लापता मामले, दिल्ली हाई कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से किया इनकार

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नई दिल्ली, 10 फरवरी (आईएएनएस)। दिल्ली में जनवरी महीने के दौरान करीब 800 लोगों के कथित तौर पर लापता होने को लेकर दायर याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने फिलहाल जल्द सुनवाई से इनकार कर दिया है। मंगलवार को कोर्ट ने कहा कि यह याचिका अपने आप तय प्रक्रिया के तहत सूचीबद्ध हो जाएगी और इसके लिए अलग से तत्काल सुनवाई की जरूरत नहीं है।

इस मामले को लेकर याचिकाकर्ता ने दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के सामने मेंशनिंग की थी और तुरंत सुनवाई की मांग की थी, लेकिन अदालत ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया।

दिल्ली हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि दिल्ली पुलिस को कानून के तहत हर संभव कार्रवाई करने का पूरा अधिकार है और वह अपने दायित्वों का निर्वहन कर रही है। अदालत का मानना है कि मामला अपने समय पर सुना जाएगा और फिलहाल इसमें किसी आपात हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है।

इस बीच, 9 फरवरी को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने इस मुद्दे पर स्वतः संज्ञान लिया था। एनएचआरसी ने एक मीडिया रिपोर्ट के आधार पर यह कदम उठाया, जिसमें दावा किया गया था कि जनवरी के पहले दो हफ्तों में दिल्ली में 807 लोग लापता हुए हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक इनमें 191 नाबालिग और 616 वयस्क शामिल थे। आंकड़ों के अनुसार अब तक 235 लोगों का पता लगाया जा चुका है, जबकि 572 लोग अभी भी लापता बताए गए हैं।

एनएचआरसी ने कहा कि अगर यह रिपोर्ट सही है, तो यह गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन का मामला बनता है। इसी को ध्यान में रखते हुए आयोग ने दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव और दिल्ली पुलिस कमिश्नर को नोटिस जारी कर दो हफ्तों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

हालांकि, इस पूरे मामले पर दिल्ली पुलिस पहले ही अपनी स्थिति साफ कर चुकी है। 6 फरवरी को दिल्ली पुलिस ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट जारी कर कहा था कि आंकड़ों को गलत तरीके से पेश कर लोगों में डर फैलाया जा रहा है।

पुलिस ने चेतावनी दी थी कि जो लोग जानबूझकर भ्रामक जानकारी फैलाकर दहशत का माहौल बना रहे हैं, उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

दिल्ली पुलिस का कहना है कि कुछ रिपोर्ट्स में बच्चों, खासकर लड़कियों के अचानक गायब होने के मामलों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया है, जबकि आधिकारिक आंकड़े ऐसा नहीं बताते। पुलिस के मुताबिक, पिछले करीब दस सालों के रिकॉर्ड देखने पर यह साफ होता है कि लापता बच्चों के मामलों में कोई असामान्य या अचानक बढ़ोतरी नहीं हुई है।