नई दिल्ली, 11 फरवरी (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा में हुई हिंसा की एनआईए जांच को लेकर दायर राज्य सरकार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने अहम आदेश दिया है। शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार की अर्जी को वापस कलकत्ता हाईकोर्ट भेजते हुए कहा कि हाईकोर्ट राज्य सरकार द्वारा उठाए गए सवालों पर दोबारा विचार करे।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि एनआईए अपनी जांच रिपोर्ट कलकत्ता हाईकोर्ट में सीलबंद लिफाफे में जमा करे। अदालत ने स्पष्ट किया कि पश्चिम बंगाल सरकार की अर्जी पर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच सुनवाई करेगी, जहां पहले से संबंधित याचिका लंबित है।
केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) एसवी राजू ने अदालत में कहा कि बांग्लादेश के साथ सटी सीमा ‘पोरस बॉर्डर’ है और वहां गंभीर हिंसा हुई, जिसमें जानलेवा हथियारों का इस्तेमाल किया गया।
उन्होंने कहा कि एनआईए स्वतंत्र जांच कर रही है, लेकिन राज्य सरकार एजेंसी को जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा रही है। केंद्र ने अदालत से अनुरोध किया कि राज्य सरकार को कागजात मुहैया कराने का निर्देश दिया जाए।
सुनवाई के दौरान जस्टिस बागची ने कहा कि राज्य सरकार ने उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें एनआईए को जांच का विकल्प दिया गया था। उन्होंने कहा कि एनआईए की जांच का औचित्य हाईकोर्ट के निर्णय पर निर्भर करेगा।
दरअसल, नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी की याचिका पर कलकत्ता हाईकोर्ट ने कहा था कि यदि केंद्र सरकार चाहे तो बेलडांगा हिंसा की जांच एनआईए को सौंपी जा सकती है। इसके बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मामले की जांच एनआईए को सौंप दी थी।
यह हिंसा 16 जनवरी को उस समय भड़की थी, जब झारखंड में मारे गए मुर्शिदाबाद के प्रवासी मजदूर अलाउद्दीन शेख का शव बेलडांगा पहुंचा। लोगों ने सड़क जाम कर विरोध प्रदर्शन किया। आरोप लगाया गया कि अलाउद्दीन को बांग्ला भाषी होने के कारण बांग्लादेशी समझकर हत्या की गई।

