अखिलेश यादव ने यूपी बजट को ‘विदाई बजट’ दिया करार

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लखनऊ, 11 फरवरी (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश विधानसभा में पेश किए गए सरकार के 10वें बजट पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कड़ा प्रहार करते हुए इसे ‘विदाई बजट’ करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि बजट का आकार भले ही बड़ा दिखाया जा रहा हो, लेकिन जमीनी हकीकत में यह जनता की अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरता।

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने बुधवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा, “जब मुंह खोला तब बुरा बोला। यह विदाई बजट है और अब भाजपा की विदाई तय है।” उन्होंने कहा कि सरकार 9 लाख करोड़ रुपए से अधिक के बजट को उपलब्धि के रूप में पेश कर रही है, जबकि हर वर्ष बजट का आकार स्वाभाविक रूप से बढ़ता है। असली सवाल यह है कि पिछले बजटों का पूरा उपयोग क्यों नहीं हो सका। उनके अनुसार सरकार 50 प्रतिशत से अधिक राशि भी प्रभावी ढंग से खर्च नहीं कर पाई, जो प्रशासनिक अक्षमता को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि यदि उत्तर प्रदेश को तीन ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य है, तो राज्य की सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) लगभग 90 लाख करोड़ रुपए के आसपास होनी चाहिए। मौजूदा दावों और वास्तविक आंकड़ों में बड़ा अंतर है, जिससे सरकार की मंशा और तैयारी पर प्रश्नचिह्न लगता है।

सपा प्रमुख ने एमएसएमई क्षेत्र का मुद्दा उठाते हुए कहा कि प्रदेश में लगभग 92 लाख इकाइयां हैं, जिनमें से 82 लाख अब तक पंजीकृत नहीं हैं। उन्होंने पूछा कि एक दशक में इतनी बड़ी संख्या में इकाइयों का पंजीकरण क्यों नहीं हो सका। उनका आरोप था कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों और नीतिगत बदलावों का सीधा असर एमएसएमई और किसानों पर पड़ेगा, लेकिन बजट में इसके लिए स्पष्ट रणनीति नहीं दिखाई देती। उन्होंने कहा कि युवाओं को रोजगार देने में सरकार विफल रही है और निवेश के बड़े दावों के बावजूद धरातल पर सीमित निवेश ही आया है। स्वास्थ्य सेवाओं और कानून-व्यवस्था को लेकर भी उन्होंने गंभीर सवाल उठाए।

अखिलेश यादव ने कहा कि बजट विकास की ठोस रूपरेखा प्रस्तुत करने के बजाय राजनीतिक प्रचार का माध्यम बन गया है। उन्होंने जनता से अपील की कि वे बजट के दावों और वास्तविक क्रियान्वयन के बीच के अंतर को समझें। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार उपलब्धियों का दावा कर रही है, जबकि हकीकत यह है कि विभागों को आवंटित धनराशि का पूरा उपयोग तक नहीं हो पा रहा।

उनके मुताबिक कृषि विभाग में करीब 57 प्रतिशत, स्वास्थ्य में 58 प्रतिशत और बेसिक शिक्षा में लगभग 62 प्रतिशत बजट ही खर्च किया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब पिछली योजनाओं की रकम ही पूरी तरह खर्च नहीं हो सकी, तो नए और बड़े बजट की घोषणाओं से आम जनता को वास्तविक लाभ कैसे मिलेगा।