कोलकाता, 12 (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और चुनाव आयोग के बीच तनातनी बरकरार है। बंगाल सरकार ने 8,505 ग्रुप-बी अधिकारी एसआईआर के लिए नियुक्त किए थे, लेकिन आयोग को गुरुवार सुबह तक राज्य सरकार की ओर से इन अधिकारियों का डिटेल्ड बैकग्राउंड नहीं मिला।
पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय से जुड़े सूत्रों ने बताया कि आयोग ने राज्य सरकार से सभी 8,505 अधिकारियों समेत कई लोगों की ग्रुप-बी अधिकारी के तौर पर स्थिति संदेहास्पद होने पर उनके बारे में विस्तृत जानकारी मांगी थी।
सूत्रों ने कहा, “ड्राफ्ट मतदाता सूची पर दावों और आपत्तियों पर सुनवाई के सेशन 14 फरवरी को पूरे होने में सिर्फ दो दिन बचे हैं, इसलिए इन 8,505 अधिकारियों में से किसी के भी सुनवाई प्रोसेस में शामिल होने की संभावना बहुत कम है। उनमें से कुछ 14 फरवरी से 21 फरवरी तक डॉक्यूमेंट की जांच और निपटान के दौरान शामिल हो सकते हैं। हालांकि, यह इस बात पर भी निर्भर करेगा कि राज्य सरकार इन अधिकारियों की पहचान को कितना स्पष्ट करती है।”
इसके अलावा, सूत्रों का कहना है कि आयोग को कुछ जानकारियां मिली हैं, जिनसे पता चलता है कि कुछ अपर-डिवीजन क्लर्क और यहां तक कि टाइपिस्ट के नाम भी उन 8,505 ग्रुप-बी अधिकारियों की लिस्ट में शामिल हैं। ऐसी भी जानकारी है कि एक रिटायर्ड राज्य सरकार के कर्मचारी का नाम भी उसी लिस्ट में शामिल किया गया था। चुनाव आयोग ने संदेहास्पद नामों पर उनके बैकग्राउंड की जानकारी राज्य सरकार और उनसे जुड़े राज्य सरकार के संबंधित विभागों से मांगी थी।
फाइनल मतदाता सूची 28 फरवरी को जारी होगी। इसके अगले दिन चुनाव आयोग की पूरी बेंच एसआईआर के बाद के हालात का जायजा लेने के लिए दो दिन के दौरे पर कोलकाता पहुंचेगी। उसके तुरंत बाद भारतीय निर्वाचन आयोग राज्य में विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर सकता है।

