भोपाल: ईडी ने पूर्व ट्राइबल अधिकारी जगदीश सरवटे की 11.81 करोड़ की 9 संपत्तियां मनी लॉन्ड्रिंग केस में अटैच कीं

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भोपाल, 12 फरवरी (आईएएनएस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के भोपाल जोनल ऑफिस ने मध्य प्रदेश के एक पूर्व सरकारी अधिकारी के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। ईडी ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के तहत जगदीश प्रसाद सरवटे की 11.81 करोड़ रुपए की अचल संपत्तियों को प्रोविजनल रूप से अटैच (जब्त) कर लिया है।

सरवटे आदिम जाति कल्याण विभाग (ट्राइबल वेलफेयर डिपार्टमेंट), जबलपुर के पूर्व डिप्टी डायरेक्टर थे। ईडी ने जबलपुर के इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (ईओडब्ल्यू) द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की थी। इस एफआईआर में प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट, 1988 की धारा 13(1)(बी) और 13(2) के तहत आरोप लगाए गए हैं।

आरोप है कि सरवटे ने अपनी ज्ञात आय से कहीं अधिक संपत्ति जमा की है। जांच में पाया गया कि सरवटे ने अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग करते हुए गैरकानूनी तरीके से पैसे कमाए और उन्हें अचल संपत्तियों में निवेश किया।

ईडी की जांच के अनुसार, सरवटे ने चेक पीरियड के दौरान जबलपुर में आदिम जाति कल्याण विभाग में काम करते हुए भ्रष्टाचार से कमाए पैसे से कई संपत्तियां बनाईं। इनमें भोपाल, मंडला, उमरिया और सिवनी जिलों में रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी, कृषि भूमि, कमर्शियल जमीन और एक रेस्टोरेंट शामिल हैं। कई संपत्तियां भारी कैश पेमेंट से खरीदी गईं, जबकि कुछ लोन चुकाने के लिए बिना जानकारी के कैश डिपॉजिट का इस्तेमाल किया गया।

जांच से साफ हुआ कि सरवटे ने अपराध से कमाए पैसे को अचल संपत्तियों में लगाकर लेयरिंग (परत-दर-परत निवेश) और इंटीग्रेशन (मिलाकर वैध दिखाना) की प्रक्रिया अपनाई। इससे दागी कमाई को साफ-सुथरी संपत्ति के रूप में दिखाया गया, जो क्लासिक मनी लॉन्ड्रिंग है।

इसलिए ईडी ने पीएमएलए की धारा 5(1) के तहत 9 अचल संपत्तियों को कुल 11.81 करोड़ रुपए की कीमत पर प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर जारी किया है। इसका मकसद इन संपत्तियों के ट्रांसफर या डिस्पोजल को रोकना और आगे की जब्ती की कार्रवाई को सुरक्षित करना है।

जांच में बैंक रिकॉर्ड, ट्रांजेक्शन डिटेल्स और अन्य संदिग्ध संपत्तियों की गहन पड़ताल जारी है। आगे की जांच से और खुलासे होने की संभावना है।