नई दिल्ली, 13 फरवरी (आईएएनएस)। संसद के बजट सत्र के पहले चरण का शुक्रवार को आखिरी दिन रहा। इस दौरान सदन में हुए हंगामे और कार्यवाही में आई रुकावटों को लेकर शिवसेना (यूबीटी) की राज्यसभा सदस्य प्रियंका चतुर्वेदी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा।
प्रियंका चतुर्वेदी ने आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा कि इस पूरे सत्र में लोकतंत्र का दुरुपयोग देखने को मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि सदन को सुचारू रूप से नहीं चलने दिया गया और जिन मुद्दों पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए थी, उन पर बात ही नहीं हो सकी।
प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा, “बजट सत्र के पहले हिस्से का आज अंतिम दिन है, लेकिन सदन ठीक से नहीं चला। जो उम्मीदें थीं और जो सवाल उठने चाहिए थे, उन पर चर्चा नहीं हुई। मुझे लगता है कि यह सत्र आने वाले इतिहास में कलंकित अक्षरों में लिखा जाएगा।”
प्रियंका चतुर्वेदी ने विशेष रूप से उस घटना का जिक्र किया जब नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को पूर्व सेना प्रमुख की किताब से अंश पढ़ने से रोका गया। उनका कहना था कि वह किताब गलवान मुद्दे और उस समय के सैन्य नेतृत्व से जुड़े फैसलों पर आधारित है। पूर्व आर्मी चीफ ने अपने कार्यकाल और निर्णयों पर कई किताबें लिखी हैं, लेकिन जब नेता प्रतिपक्ष उस किताब का हिस्सा पढ़ रहे थे, तो उसे देशविरोधी बताकर रोक दिया गया।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव देने के लिए सदन में उपस्थित नहीं हुए। साथ ही महिला सांसदों के प्रति टिप्पणी की गई और विपक्षी सांसदों को निलंबित कर दिया गया।
केंद्रीय बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि यह ‘जनता के लिए अनकंफर्टेबल बजट’ है। आम लोगों की परेशानियों और महंगाई जैसे मुद्दों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।
उन्होंने बांग्लादेश और भारत के संबंधों का भी जिक्र किया और कहा कि पिछले कुछ समय में रिश्तों में खटास आई है। राज्यसभा सदस्य ने आरोप लगाया कि वहां अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं को निशाना बनाया गया, उन पर हमले हुए और लिंचिंग की घटनाएं सामने आईं।

