वंदे मातरम पर नोटिफिकेशन वापस ले सरकार, अनिवार्य करना सही नहीं: मौलाना इमरान रशादी

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बेंगलुरु, 13 फरवरी (आईएएनएस)। वंदे मातरम गायन को लेकर केंद्र सरकार की गाइडलाइंस के खिलाफ विरोध जारी है। मौलाना मौलाना मोहम्मद मकसूद इमरान रशादी ने कहा कि वंदे मातरम की कुछ पंक्तियां हमारी धार्मिक मान्यताओं के खिलाफ हैं।

बेंगलुरु में आईएएनएस से बातचीत में मौलाना मोहम्मद मकसूद इमरान रशादी ने कहा कि देखिए, भारत एक सेक्युलर देश है और भारतीय संविधान में हर व्यक्ति को अपने धर्म को मानने और उसका पालन करने का अधिकार दिया गया है। हिंदू को अपने धर्म के अनुसार पूजा-पाठ करने की इजाजत है, तो वैसे ही मुसलमानों को भी अधिकार है। इसलिए, यदि हमारे गैर-मुस्लिम भाई वंदे मातरम गाते हैं, तो हमें कोई ऐतराज नहीं है, लेकिन मुसलमान होने के नाते हमारी मान्यताओं के अनुसार, इस गीत में कुछ देवी-देवताओं का जिक्र है, जिस कारण हमारे बुजुर्गों ने इसे हमारे लिए मुनासिब नहीं माना।

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के कुछ फैसलों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सरकार वंदे मातरम पर जो नया नोटिफिकेशन लाई है, यह सीधे तौर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के भी खिलाफ लगता है।

मौलाना मोहम्मद मकसूद इमरान रशादी ने कहा कि हमारा विरोध केवल इतना है कि अगर गैर-मुस्लिम भाई इसे गाएं या पढ़ें, तो हमें कोई आपत्ति नहीं, लेकिन इसे अनिवार्य बनाना और स्कूलों में सभी बच्चों (जिनमें मुस्लिम बच्चे भी शामिल हैं) के लिए इसे पढ़ना जरूरी करना उचित नहीं है, क्योंकि गीत की कुछ पंक्तियां हमारी धार्मिक मान्यताओं के विरुद्ध हैं। हम राष्ट्रगान पढ़ते हैं और उसे पढ़ने दिया जाए। हमें राष्ट्रगान से भी कोई दिक्कत नहीं है। वंदे मातरम के गायन को लेकर जबरदस्ती न की जाए। कर्नाटक में अमन चैन बना रहे, इसके जरिए तनाव पैदा न किया जाए।

मौलाना ने प्रधानमंत्री मोदी से अपील की कि वे इस मुद्दे पर गंभीरता से सोचें जिससे अमन-चैन भंग न हो। उन्होंने मांग की कि सरकार इस नोटिफिकेशन को वापस ले। उन्होंने कहा कि हम सियासी मामलों में दखल नहीं देते। हमारा काम तालीम के सिलसिले में काम करना और लोगों के बीच मोहब्बत और एकता की भावना पैदा करना है।