ब्लू इकॉनमी को बढ़ावा : पुडुचेरी के सीएम ने कहा कि मछुआरे ग्लोबल एक्सपोर्ट एंटरप्रेन्योर बनेंगे

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पुडुचेरी, 13 फरवरी (आईएएनएस)। पुडुचेरी अपने पारंपरिक मछली पकड़ने वाले समुदाय को एक आधुनिक, निर्यात-संचालित समुद्री अर्थव्यवस्था के केंद्र में फिर से स्थापित करने के लिए तैयार है। मुख्यमंत्री एन. रंगासामी ने शुक्रवार को मछुआरों को उद्यमी और वैश्विक समुद्री खाद्य निर्यातक में बदलने की महत्वाकांक्षी योजना की रूपरेखा तैयार की।

बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में मरीन फिशरीज वैल्यू चेन पर दो दिन की इंटरनेशनल वर्कशॉप के आखिरी सेशन में बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सेंट्रल और यूनियन टेरिटरी स्कीमों का कॉम्बिनेशन फिशरीज सेक्टर के काम करने के तरीके को पूरी तरह से बदल देगा।

रंगसामी ने इंटीग्रेटेड पोर्ट डेवलपमेंट स्कीम और फिशरीज प्रोसेसिंग क्लस्टर जैसी पहलों की ओर इशारा करते हुए कहा, “मछुआरे अब सिर्फ़ मछली पकड़ने और बेचने तक ही सीमित नहीं रहेंगे। वे बिजनेस के मालिक और इंटरनेशनल एक्सपोर्टर बनेंगे।”

उन्होंने आगे कहा कि पुडुचेरी का सीफूड, जो अपने स्वाद और न्यूट्रिशनल क्वालिटी के लिए जाना जाता है, की घरेलू और विदेशी दोनों मार्केट में अच्छी डिमांड है।

यह वर्कशॉप, जिसे बे ऑफ बंगाल प्रोग्राम इंटर-गवर्नमेंटल ऑर्गनाइजेशन (बीओबीपी-आईजीओ) और पुडुचेरी सरकार ने यूएन फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गनाइजेशन (एफएओ), आईसीएआर-सेंट्रल मरीन फिशरीज रिसर्च इंस्टीट्यूट, नेशनल फिशरीज डेवलपमेंट बोर्ड और एनवायर्नमेंटल डिफेंस इंडिया फाउंडेशन के साथ मिलकर ऑर्गनाइज किया था, वैल्यू एडिशन, प्रोसेसिंग टेक्नोलॉजी और मार्केट लिंकेज पर फोकस किया गया।

पुडुचेरी को एक हाई-वैल्यू मरीन एक्सपोर्ट हब बनाने के लिए एक पूरा रोडमैप भी मुख्यमंत्री को दिया गया।

बीओबीपी के डायरेक्टर डॉ. पी. कृष्णन ने कहा कि पुडुचेरी पहले से ही नेशनल बेंचमार्क से बेहतर परफॉर्म कर रहा है, यहां हर ट्रिप में एवरेज 6,095 किलोग्राम मछली पकड़ी जाती है, जो नेशनल एवरेज से दोगुने से भी ज्यादा है, और इसके आधे से ज्यादा जहाजों में 140 एचपी से ज्यादा के इंजन लगे हैं।

हालांकि, उन्होंने बताया कि कमजोर कोल्ड चेन सिस्टम, बर्फ की ज्यादा लागत और इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी की वजह से लगभग 43 प्रतिशत मछली बिना वैल्यू एडिशन के केंद्र शासित प्रदेश से चली जाती है।

रोडमैप में वेलफेयर से जुड़ी चिंताओं पर भी ध्यान दिया गया, जिसमें असली लागत के मुकाबले कम सब्सिडी, काफी इंश्योरेंस कवरेज, बैन-सीजन में सीमित मुआवजा और खराब सेफ्टी इक्विपमेंट शामिल हैं।

इसमें महिलाओं को ज्यादा सपोर्ट देने की भी बात कही गई, यह देखते हुए कि 15,000 से ज्यादा सदस्यों वाली 24 मछुआरी महिला कोऑपरेटिव सोसाइटी पहले से ही एक्टिव हैं।

फिशरीज मिनिस्टर के. लक्ष्मीनारायणन ने इस फोरम को एक ऐसा प्लेटफॉर्म बताया जो रोजगार के नए मौके पैदा करेगा और लोकल मछुआरों को मल्टीनेशनल सीफूड कंपनियों के साथ मुकाबला करने में मदद करेगा।

एफएओ की अधिकारी एंजेला लेंटिस्को और फिशरीज डायरेक्टर ए. मोहम्मद इस्माइल ने भी लोगों को संबोधित किया और इस सेक्टर के लिए सस्टेनेबल और इनक्लूसिव ग्रोथ पर जोर दिया।