आईसीएमआर प्रमुख ने निपाह वायरस मामले पर बंगाल की प्रतिक्रिया की सराहना की

0
8

कोलकाता, 14 फरवरी (आईएएनएस)। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने शनिवार को पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा हाल ही में सामने आए निपाह वायरस मामले पर की गई प्रतिक्रिया की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि राज्य ने केंद्र के साथ समन्वय में प्रभावी ढंग से काम करके इसके प्रसार को रोका है।

डॉ. बहल ने ये टिप्पणियां कोलकाता के कल्याणी क्षेत्र में स्थित आईसीएमआर-राष्ट्रीय जैवचिकित्सा जीनोमिक्स संस्थान (आईसीएमआर-एनआईबीएमजी) के अपने दौरे के दौरान कीं, जहां उन्होंने पद्म विभूषण पुरस्कार से सम्मानित डॉ. दिलीप महालनाबिस की प्रतिमा का अनावरण किया।

निपाह वायरस की स्थिति पर बोलते हुए, डॉ. बहल ने कहा कि घबराने की कोई बात नहीं है, क्योंकि समय पर निगरानी और निवारक उपायों से संक्रमण को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है।

उन्होंने बताया कि पश्चिम बंगाल में 2001 और 2007 में, साथ ही केरल में भी, निपाह वायरस संक्रमण के मामले सामने आए थे, लेकिन मामलों की संख्या सीमित रही।

उन्होंने आगे कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा निगरानी और रोकथाम के प्रयासों में उठाए गए सक्रिय कदम सराहनीय हैं।

डॉ. बहल ने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़ और केरल सहित कई राज्यों में चमगादड़ों में निपाह वायरस के प्रमाण मिले हैं, जो निरंतर निगरानी के महत्व को रेखांकित करते हैं।

हाल ही में, पश्चिम बंगाल में दो नर्सें निपाह वायरस से संक्रमित पाई गईं, जिनमें से एक की उत्तर 24 परगना जिले के बारासात स्थित एक अस्पताल में इलाज के दौरान मृत्यु हो गई।

राज्य स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि संक्रमित नर्सों के संपर्क में आए व्यक्तियों की पहचान करने के लिए संपर्क ट्रेसिंग की गई। पहचाने गए लोगों से लिए गए नमूनों की जांच की गई और परिणाम नेगेटिव पाए गए।

अधिकारियों ने बताया कि राज्य में अभी तक निपाह वायरस का कोई नया मामला सामने नहीं आया है।

निपाह वायरस एक खतरनाक संक्रमण है जो पश्चिम बंगाल और केरल सहित भारत के कुछ हिस्सों में समय-समय पर सामने आता रहा है।

यह वायरस मुख्य रूप से फल खाने वाले चमगादड़ों और मनुष्यों के निकट संपर्क के माध्यम से फैलता है।