बेंगलुरु, 16 फरवरी (आईएएनएस)। कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के भीतर जारी सत्ता-साझेदारी को लेकर बढ़ते तनाव के बीच पार्टी के कुछ विधायकों का प्रस्तावित विदेशी दौरा राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया खेमे से जुड़े कई विधायक ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की यात्रा पर जाने की तैयारी में हैं।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने राज्य नेतृत्व को आपसी मतभेद भुलाकर सहमति से आगे बढ़ने की सलाह दी है।
सूत्रों के अनुसार, शुरुआत में करीब 27 कांग्रेस विधायक और विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) इस दौरे में शामिल होने वाले थे। बाद में यह संख्या घटाकर लगभग 20 विधायकों तक कर दी गई। छह से सात एमएलसी के भी शामिल होने की संभावना है।
बताया जा रहा है कि यह दल 17 फरवरी की शाम बेंगलुरु से रवाना होगा और 1 मार्च को लौटेगा। हालांकि वीजा संबंधी दिक्कतों और अन्य कारणों से कुछ विधायकों ने यात्रा रद्द कर दी है, जबकि कुछ अंतिम समय में निर्णय लेंगे।
सूत्रों का कहना है कि यह विदेशी दौरा उपमुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डी.के. शिवकुमार तथा उनके समर्थकों द्वारा राज्य नेतृत्व पर दिए जा रहे बयानों को हल्का दिखाने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
हाल ही में शिवकुमार ने नई दिल्ली में सोनिया गांधी से मुलाकात के बाद कहा था कि “समय ही सबका जवाब देगा।” उनके समर्थक खुले तौर पर कांग्रेस हाईकमान से कर्नाटक में नेतृत्व के मुद्दे पर फैसला करने की मांग कर रहे हैं।
शिवकुमार के करीबी विधायक इकबाल हुसैन ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से समाजवादी सिद्धांतों का हवाला देते हुए पद छोड़ने की अपील की थी। उनका दावा है कि 80 से 90 विधायक शिवकुमार को अगला मुख्यमंत्री बनाना चाहते हैं।
एक अन्य विधायक गणिगा रविकुमार ने भी संकेत दिया कि शिवकुमार जानते हैं कब और कैसे कदम उठाना है, जिससे नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें और तेज हो गईं।
नेतृत्व परिवर्तन की मांगों के बीच मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने विशेष सत्र के तुरंत बाद सामान्य से पहले प्री-बजट बैठकों की शुरुआत कर दी। उनके पुत्र और एमएलसी यतींद्र सिद्धारमैया ने कहा है कि उनके पिता अपना पूरा कार्यकाल पूरा करेंगे और कांग्रेस हाईकमान ने नेतृत्व परिवर्तन की मांग को खारिज कर दिया है।
पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि बजट तैयारियों की रणनीति से शिवकुमार खेमे को शांत नहीं किया जा सका, जिसके बाद विधायकों के विदेशी दौरे की योजना बनाई गई ताकि हाईकमान को यह संदेश दिया जा सके कि सिद्धारमैया के नेतृत्व में सब कुछ सामान्य है और विधायक संतुष्ट हैं।
सूत्रों के मुताबिक, शिवकुमार खेमे ने यह संदेश भी दिया है कि मौजूदा परिस्थितियों में विदेश जाने वाले विधायकों पर हाईकमान की नजर रहेगी। इसी आशंका के चलते कुछ विधायकों ने दौरे से दूरी बनाई है।
राजनीतिक गलियारों में इस घटनाक्रम को नेतृत्व संघर्ष के नए अध्याय के रूप में देखा जा रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि कितने विधायक आखिरकार इस विदेशी दौरे पर जाते हैं और इसका कर्नाटक कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति पर क्या असर पड़ता है।

