तमिलनाडु में 14,000 से अधिक स्कूलों में शुरू होगी 100 दिवसीय लर्निंग चैलेंज

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चेन्नई, 16 फरवरी (आईएएनएस)। तमिलनाडु के प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय (डीईई) ने राज्यभर के कक्षा 1 से 5 तक के विद्यार्थियों की बुनियादी शैक्षणिक क्षमताओं को मजबूत करने के लिए फरवरी के तीसरे सप्ताह से “100 दिवसीय लर्निंग चैलेंज” शुरू करने की घोषणा की है।

यह पहल वर्ष 2024–25 में संचालित पायलट कार्यक्रम की सफलता पर आधारित है, जिसका उद्देश्य छात्रों की पढ़ने और गणितीय दक्षता में सुधार लाना है।

पिछले चरण में 4,552 प्राथमिक स्कूलों के विद्यार्थियों की तमिल और अंग्रेजी पढ़ने की क्षमता का आकलन किया गया था। साथ ही जोड़, घटाव, गुणा और भाग जैसी बुनियादी गणितीय क्षमताओं का मूल्यांकन एक संरचित टूल के माध्यम से किया गया, जिसे राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) ने क्षेत्रीय संसाधन केंद्रों के शिक्षक प्रशिक्षकों के सहयोग से विकसित किया था।

मूल्यांकन में छात्रों के सीखने के स्तर में मापनीय सुधार देखने को मिला, जिससे विभाग को कार्यक्रम के विस्तार का निर्णय लेने का आधार मिला।

अब 2025–26 शैक्षणिक सत्र में इस कार्यक्रम का दायरा बढ़ाकर 14,000 से अधिक स्कूलों तक किया जाएगा। इससे प्राथमिक कक्षाओं के बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं को लाभ मिलने की उम्मीद है।

विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि दिसंबर 2024 में तमिल, अंग्रेजी और गणित विषयों के लिए शुरू की गई 100-दिवसीय ओपन चैलेंज पहल ने उत्साहजनक परिणाम दिए थे। यह कार्यक्रम नियमित कक्षाओं के साथ एक विशेष हस्तक्षेप के रूप में लागू किया गया, जिससे छात्रों की पढ़ने की प्रवाहिता और बुनियादी गणनात्मक कौशल में संरचित सुधार हुआ।

बताया जा रहा है कि इस पहल की अवधारणा नवंबर 2024 में तब आकार में आई, जब राज्य के स्कूल शिक्षा मंत्री अंबिल महेश पोय्यामोझी ने टी. पुदुर पंचायत यूनियन प्राथमिक स्कूल का दौरा किया। स्कूल की प्रधानाध्यापिका के आमंत्रण पर मंत्री ने छात्रों के सीखने के स्तर का प्रत्यक्ष अवलोकन किया था।

इस दौरे के दौरान प्राथमिक स्तर पर बुनियादी सीखने की खामियों को दूर करने के लिए समयबद्ध और निरंतर शैक्षणिक हस्तक्षेप की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि 100 दिनों की अवधि के दौरान व्यवस्थित मॉनिटरिंग और नियमित आकलन जारी रहेगा, ताकि विद्यार्थियों की सीखने की प्रगति को मापनीय रूप से सुनिश्चित किया जा सके।

इस विस्तारित कार्यक्रम को राज्य में प्रारंभिक साक्षरता और संख्यात्मक दक्षता को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।