केरल में पुलिस का मनोबल गिरा रही है माकपा सरकार: केसी वेणुगोपाल

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तिरुवनंतपुरम, 16 फरवरी (आईएएनएस)। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव और सांसद केसी वेणुगोपाल ने सोमवार को आरोप लगाया कि केरल में केवल वही लोग विशेषाधिकार पा रहे हैं जो माकपा के लिए हिंसा और लूटपाट में शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी निभाने वाले पुलिस अधिकारियों पर हमले हो रहे हैं, जबकि सरकार उन डीवाईएफआई कार्यकर्ताओं को संरक्षण दे रही है जिन्होंने एक पुलिस अधिकारी पर उस समय हमला किया जब वह अपने परिवार के साथ थे।

वेणुगोपाल ने कहा, “यह कार्रवाई पुलिस बल का मनोबल तोड़ने वाली है। पुलिस अधिकारी निष्पक्ष रूप से कानून लागू करने में असमर्थ हो रहे हैं।”

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि माकपा के लिए राजनीतिक हत्याएं करने वालों को जेल में विशेष वर्ग की तरह रखा जाता है।

उन्होंने कहा, “विजयन सरकार उन्हें हत्यारा नहीं मानती। सरकार की कानून का शासन लागू करने में कोई रुचि नहीं है। यह राज्य को अराजकता की ओर धकेल रही है।”

वेणुगोपाल ने यह भी कहा कि वर्तमान सरकार के कामकाज से वामपंथी विचारधारा रखने वाले कई लोग निराश हैं और जब वे अपनी राय व्यक्त करते हैं तो उनके लिए वाम दलों में बने रहना मुश्किल हो जाता है।

फिल्म अभिनेता प्रेमकुमार से जुड़े सवाल पर वेणुगोपाल ने कहा कि जो लोग ऐसी परिस्थितियों में वामपंथ छोड़ते हैं, उनका कांग्रेस खुले दिल से स्वागत करेगी।

मणि शंकर अय्यर के बयान पर उन्होंने स्पष्ट किया कि अय्यर लंबे समय से पार्टी गतिविधियों से जुड़े नहीं हैं और उनकी टिप्पणियां व्यक्तिगत राय हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी का आधिकारिक रुख पहले ही एआईसीसी संचार विभाग द्वारा स्पष्ट किया जा चुका है।

कृषि संकट पर बोलते हुए वेणुगोपाल ने कहा कि मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार ‘कर्षक श्री’ पुरस्कार जीतने वाले एक किसान ने सरकार से समय पर भुगतान न मिलने के कारण आत्महत्या कर ली।

उन्होंने कहा, “केरल में किसानों की स्थिति बेहद दयनीय है।” पलक्कड़ में धान किसानों से मुलाकात के दौरान उन्होंने उनकी परेशानियों को प्रत्यक्ष रूप से समझा।

वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि पिनराई सरकार ने ओमन चांडी के कार्यकाल में किसानों को मिलने वाली राशि, जिसमें केंद्र की सब्सिडी भी शामिल थी, उसे घटा दिया है।

उन्होंने आगे कहा कि केंद्र ने अब 6.31 रुपये के अतिरिक्त राज्य बोनस को भी बंद करने का आदेश दे दिया है। कर्ज में डूबे किसानों के लिए यह कदम उन्हें और गहरे संकट में धकेलने जैसा है।