कांग्रेस का वर्तमान ढांचा दोषपूर्ण, नेताओं के पार्टी छोड़ने पर आत्ममंथन करे पार्टी: संजय निरुपम

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मुंबई, 17 फरवरी (आईएएनएस)। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर के ‘मैं नेहरू और राजीववादी हूं पर राहुलवादी नहीं’ बयान के बाद सियासत तेज हो गई है। शिवसेना नेता संजय निरुपम ने अय्यर के इस बयान और कांग्रेस की स्थिति पर अपनी प्रतिक्रिया दी।

शिवसेना नेता ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कहा कि कांग्रेस को आत्‍मावलोकन की जरूरत है। उसे आत्ममंथन करना चाहिए कि आखिर कार्यकर्ता किन परिस्थितियों में पार्टी से दूर हो रहे हैं।

निरुपम ने कहा कि मणिशंकर अय्यर कांग्रेस के वरिष्ठ और अनुभवी नेता रहे हैं, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में उन्हें पार्टी के भीतर उपेक्षा और प्रताड़ना का सामना करना पड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी में उनके जूनियर नेता ऊंचे पदों पर बैठकर उनके खिलाफ कार्रवाई करते रहे हैं और यह सब राहुल गांधी के इशारे पर हुआ। इसी कारण अय्यर की नाराजगी अब खुलकर सामने आई है।

शिवसेना नेता संजय निरुपम ने कहा कि अय्यर का पहला मुद्दा यह है कि जब उन्हें केरल में किसी कार्यक्रम के लिए आमंत्रित किया जाता है, तो प्रदेश कांग्रेस के कुछ नेता उनके आने का विरोध करते हैं। उन्होंने इसे गलत बताते हुए कहा कि मणिशंकर अय्यर सबसे पहले इस देश के नागरिक हैं और उन्हें भारत के किसी भी हिस्से में जाने से कोई राजनीतिक दल नहीं रोक सकता।

उन्होंने कांग्रेस संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल पर भी निशाना साधा। निरुपम ने आरोप लगाया कि उनके कार्यकाल में कांग्रेस की राष्ट्रीय स्तर पर स्थिति कमजोर हुई है। उन्होंने सवाल उठाया कि वे पार्टी को मजबूत करने का काम कर रहे हैं या अनजाने में विरोधी दलों को फायदा पहुंचा रहे हैं? उन्होंने यह भी कहा कि यह कांग्रेस का आंतरिक मामला है और वे केवल अपनी राजनीतिक टिप्पणी दे रहे हैं।

मणिशंकर अय्यर ने यह भी कहा था कि कांग्रेस में क्षमता और जमीन से जुड़े कई नेता, जो कभी गांधी परिवार के समर्थक रहे, पार्टी छोड़कर जा चुके हैं। इस पर निरुपम ने कहा कि कांग्रेस को आत्ममंथन करना चाहिए कि आखिर ऐसे लोग किन परिस्थितियों में पार्टी से दूर हुए।

उनके मुताबिक, दिल्ली में कांग्रेस का वर्तमान ढांचा दोषपूर्ण है और प्रतिभाओं को सम्मान नहीं मिल रहा, जिसकी वजह से लगातार नेता पार्टी छोड़ रहे हैं। उन्होंने टिप्पणी की कि यदि पार्टी ने इन सवालों पर गंभीरता से विचार नहीं किया, तो यह उसका आत्मघाती कदम साबित हो सकता है।

वहीं, पीएम मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की मुलाकात पर शिवसेना नेता ने कहा कि इस समय मुंबई अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है, क्योंकि फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दोनों मुंबई में मौजूद हैं और उनके बीच अहम वार्ता होनी है। निरुपम ने कहा कि यह मुंबई के लिए गौरव की बात है कि प्रधानमंत्री मोदी ने एक वैश्विक महाशक्ति के प्रमुख से संवाद के लिए इस शहर को चुना। उन्होंने इस वार्ता की सफलता के लिए शुभकामनाएं भी दीं।