बालासाहेब ठाकरे की जन्म शताब्दी के अवसर पर ‘विशेष डाक टिकट’ जारी करे केंद्र: राहुल शेवाले

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मुंबई, 17 फरवरी (आईएएनएस)। शिवसेना के राष्ट्रीय महासचिव और पूर्व सांसद राहुल शेवाले ने केंद्र सरकार से पूर्व शिवसेना प्रमुख दिवंगत बालासाहेब ठाकरे की जन्म शताब्दी के अवसर पर ‘विशेष डाक टिकट’ जारी करने की मांग की है। शेवाले द्वारा केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को दिए गए लिखित बयान पर केंद्र सरकार ने सकारात्मक रुख अपनाया है।

अपने बयान में शेवाले ने दिवंगत बालासाहेब ठाकरे के सामाजिक और राजनीतिक योगदान का उल्लेख किया है। 1960 के दशक से ही बालासाहेब ठाकरे ने महाराष्ट्र सहित पूरे देश के राजनीतिक परिदृश्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। एक हिंदुत्ववादी नेता, एक महान कार्टूनिस्ट और श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देने वाले वक्ता, बालासाहेब ने हमेशा अपनी भूमिका को विभिन्न रूपों में प्रस्तुत किया। शेवाले ने अपने बयान में यह भी लिखा है कि अपने लेखन, भाषणों और कार्टूनों के माध्यम से उन्होंने आम आदमी के मन में आत्मसम्मान की भावना को जागृत किया।

हाल ही में, 27 जनवरी को, बालासाहेब ठाकरे की 100वीं जयंती पूरे देश में धूमधाम से मनाई गई। बालासाहेब ठाकरे की जन्म शताब्दी के अवसर पर उन्हें विशेष श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए, शेवाले ने एक बयान में केंद्र सरकार से विशेष डाक टिकट जारी करने और उन्हें उचित सम्मान देने की मांग की है, ताकि देश भर के लाखों प्रशंसकों की इच्छा पूरी हो सके।

इससे पहले बालासाहेब ठाकरे की जन्म शताब्दी के अवसर पर महाराष्ट्र विधान परिषद की उपसभापति नीलम गोरहे ने उन्हें याद करते हुए श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि वह बालासाहेब ठाकरे को पिछले 28 वर्षों से जानती थीं और उनके नेतृत्व से उन्हें लगातार सीखने को मिला।

नीलम गोरहे ने आईएएनएस से कहा, “बालासाहेब ठाकरे एक ऊंचे कद के नेता थे। उन्होंने हिंदुत्व के माध्यम से राष्ट्रवाद की सोच को समझाया और अपनी विचारधारा के केंद्र में महाराष्ट्र, मराठी मानुष और छत्रपति शिवाजी महाराज की विरासत को रखा।”

उन्होंने बताया कि बालासाहेब का मानना था कि जीवन का 80 प्रतिशत हिस्सा सामाजिक कार्यों के लिए और केवल 20 प्रतिशत राजनीति के लिए होना चाहिए।

नीलम गोरहे ने यह भी कहा कि बालासाहेब ठाकरे को दुनिया भर में उनके कार्टूनों के लिए सराहा जाता था। इसके साथ ही उन्हें क्रिकेट, कला, साहित्य और संगीत में गहरी रुचि थी, जो उनकी बहुआयामी सोच को दर्शाता है।