नव केरल सर्वे पर केरल हाईकोर्ट के आदेश से विपक्ष के आरोप सही साबित: वीडी सतीशन

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पलक्कड़, 17 फरवरी (आईएएनएस)। वीडी सतीशन ने मंगलवार को कहा कि नव केरल सर्वे को लेकर केरल हाईकोर्ट के हस्तक्षेप ने पिनाराई विजयन सरकार के खिलाफ विपक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों को सही साबित कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सर्वे बड़े पैमाने पर चुनावी प्रचार के लिए सरकारी धन के दुरुपयोग का जरिया था।

सतीशन ने कहा कि यह सर्वे सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) (माकपा) की उपलब्धियों को चुनाव से पहले प्रचारित करने के उद्देश्य से तैयार किया गया एक राजनीतिक अभ्यास था। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के एक परिपत्र के जरिए सहयोगी युवा संगठन डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (डीवाईएफआई) के कार्यकर्ताओं को स्वयंसेवक नियुक्त किया गया और उन्हें सरकारी धन से भुगतान किया जा रहा था।

सतीशन ने कहा, “हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि यह सर्वे अवैध है और इसे रोका जाना चाहिए। यदि कोई धन एकत्र किया गया है तो उसे लौटाया जाना चाहिए। यह विपक्ष के रुख की स्पष्ट पुष्टि है।”

यह फैसला केएसयू नेता मुबस ओडक्कली द्वारा दायर याचिका पर आया, जिसमें राज्य अध्यक्ष अलोयसियस जेवियर भी पक्षकार बने थे।

विपक्ष के नेता ने आरोप लगाया कि राज्य गंभीर वित्तीय संकट से जूझ रहा है, फिर भी मुख्यमंत्री की तस्वीर वाले फ्लेक्स बोर्ड लगाने पर सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये खर्च किए गए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि कथित तौर पर वन अधिकारियों को कॉलोनियों में जाकर सरकारी योजनाओं का प्रचार करने के निर्देश क्यों दिए गए।

उन्होंने कहा, “क्या यह वन अधिकारियों का काम है? सरकारी मशीनरी का चुनावी प्रचार के लिए दुरुपयोग किया जा रहा है।”

सबरीमला में महिलाओं के प्रवेश के मुद्दे पर सतीशन ने सरकार पर “टालमटोल” का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या वह महिलाओं के प्रवेश के समर्थन में दायर हलफनामे में संशोधन करने जा रही है या नहीं।

उन्होंने कहा कि यूडीएफ का रुख परंपराओं की रक्षा करना है और माकपा को साफ शब्दों में बताना चाहिए कि क्या वह अपने पुराने रुख पर कायम है। सतीशन ने आरोप लगाया कि पहले दो महिलाओं के प्रवेश में सरकार और पुलिस ने सुविधा प्रदान की थी।

उन्होंने ‘ग्लोबल अय्यप्पा मीट’ के आयोजन में भी अनियमितताओं का आरोप लगाया और खर्च के दावों पर सवाल उठाते हुए पारदर्शिता की कमी बताई। इसके लिए उन्होंने देवस्वम मंत्री वी.एन. वासवन को जिम्मेदार ठहराया।

सतीशन ने धान किसानों के मुद्दे पर भी सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि खरीद भुगतान में देरी हो रही है और केंद्र की बढ़ी सहायता के बावजूद राज्य प्रोत्साहन में कटौती की गई है।

माकपा के राज्य सचिव एमवी गोविंदन की यात्रा पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने दावा किया कि यूडीएफ का अभियान “पीआर के दिखावे” के बिना भी कहीं अधिक भीड़ जुटा रहा है।