मध्य प्रदेश की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हुई: सीएम मोहन यादव

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भोपाल, 17 फरवरी (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश विधानसभा में आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया गया। इसे लेकर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि राज्य की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हुई है और राज्य सकल घरेलू उत्पाद में 11 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में मध्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था समावेशी विकास के साथ अत्यंत गतिशील अर्थव्यवस्था बन गई है। वित्तीय अनुशासन, पारदर्शी प्रशासन और दूरदर्शी नीतियों के साथ राज्य की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हुई है।

मध्य प्रदेश विधानसभा में मंगलवार को प्रस्तुत आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26 के अनुसार राज्य की अर्थव्यवस्था योजनाबद्ध रूप से संतुलित और परिणामोन्मुखी है।

सीएम ने आगे कहा कि वित्तीय वर्ष 2025-26 (अग्रिम अनुमान) में मध्य प्रदेश का सकल राज्य घरेलू उत्पाद घरेलू मूल्यों पर 16,69,750 करोड़ रुपए अनुमानित है, जो वित्तीय वर्ष 2024-25 (त्वरित अनुमान) के 15,02,428 करोड़ रुपए की तुलना में 11.14 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।

उन्‍होंने कहा कि वित्तीय वर्ष 2025-26 (अग्रिम अनुमान) में मध्य प्रदेश का सकल राज्य घरेलू उत्पाद स्थिर (2011-12) मूल्यों पर 7,81,911 करोड़ रुपए अनुमानित है, जो वित्तीय वर्ष 2024-25 (त्वरित अनुमान) के 7,23,724 करोड़ रुपए की तुलना में 8.04 प्रतिशत की वास्तविक वृद्धि को दर्शाता है।

सीएम मोहन यादव ने प्रति व्यक्ति की आय में हुई बढ़ोतरी का जिक्र करते हुए कहा कि वित्तीय वर्ष 2011-12 से वित्तीय वर्ष 2025-26 की अवधि के दौरान मध्य प्रदेश की प्रति व्यक्ति शुद्ध आय प्रचलित मूल्यों पर 38,497 से बढ़कर 169,050 हो गई तथा स्थिर (2011-12) मूल्यों पर 38,497 से बढ़कर 76,971 हो गई, जो वास्तविक आय स्तर में उल्लेखनीय सुधार को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्राथमिक क्षेत्र की जीएसवीए में हिस्सेदारी प्रचलित मूल्यों पर 43.09 प्रतिशत तथा स्थिर (2011-12) मूल्यों पर 33.54 प्रतिशत रही। प्रचलित मूल्यों पर इस क्षेत्र का कुल मूल्य वित्तीय वर्ष 2024-25 (त्वरित अनुमान) के 6,33,532 करोड़ से बढ़कर वित्तीय वर्ष 2025-26 (अग्रिम अनुमान) में 6,79,817 करोड़ हो गया, जो 7.31 प्रतिशत की वृद्धि दर को दर्शाता है।

उन्‍होंने कहा कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्राथमिक क्षेत्र के अंतर्गत फसलों का सर्वाधिक योगदान 30.17 प्रतिशत रहा, इसके बाद पशुधन 7.22 प्रतिशत, वानिकी 2.13 प्रतिशत, मत्स्यपालन एवं जलीय कृषि 0.61 प्रतिशत तथा खनन एवं उत्खनन 2.96 प्रतिशत रहा।