नई दिल्ली, 17 फरवरी (आईएएनएस)। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और फ्रांस की रक्षा मंत्री कैथरीन वोत्रां के बीच मंगलवार को एक अहम बैठक हुई। भारत और फ्रांस ने रक्षा सहयोग समझौते का नवीनीकरण अगले 10 साल के लिए बढ़ा दिया। वहीं, फ्रांस की हैमर मिसाइल भी भारत में बनेगी।
बैठक में दोनों देशों के बीच रक्षा और सुरक्षा सहयोग को नई दिशा देने पर विस्तृत चर्चा हुई। इस दौरान ये निर्णय लिए गए।
दरअसल, हैमर मिसाइल फ्रांस की एक अत्याधुनिक मीडियम रेंज की हवा से सतह पर मार करने वाली गाइडेड मिसाइल है। यह लड़ाकू विमान ‘राफेल’ का मुख्य हथियार भी है।
गौरतलब है कि भारत ने फ्रांस से राफेल लड़ाकू विमान खरीदे हैं। नए राफेल विमानों की बातचीत भी जारी है। ऐसे में हैमर मिसाइल का भारत में निर्माण होने से वायुसेना की शक्ति काफी बढ़ जाएगी।
दोनों रक्षा मंत्रियों की बातचीत का मुख्य फोकस रक्षा उपकरणों के सह-विकास और सह-उत्पादन, अत्याधुनिक तकनीक में साझेदारी, और दोनों देशों के रक्षा उद्योगों के बीच सीधा जुड़ाव मजबूत करने पर रहा।
बैठक के दौरान भारत और फ्रांस ने अगले 10 वर्षों के लिए रक्षा सहयोग समझौते को नवीनीकृत किया। यह समझौता भारतीय पक्ष की ओर से रक्षा सचिव और फ्रांसीसी पक्ष की ओर से अंतरराष्ट्रीय संबंध एवं रणनीति के उप महानिदेशक द्वारा हस्ताक्षरित किया गया। इस कदम को दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को और गहराई देने वाला माना जा रहा है।
एक और बड़ी घोषणा के तहत भारत की भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड और फ्रांस की सैफ्रान इलेक्ट्रॉनिक्स एंड डिफेंस के बीच हैमर मिसाइलों पर समझौता हुआ। भारत में हैमर मिसाइलों के निर्माण के लिए संयुक्त उद्यम के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। इस पहल से ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा मिलेगा और उन्नत हथियार प्रणालियों के क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता मजबूत होगी।
दोनों देशों ने यह भी घोषणा की कि भारतीय सेना और फ्रांसीसी थल सेना के प्रतिष्ठानों में अधिकारियों की पारस्परिक तैनाती की जाएगी। इससे सैन्य स्तर पर समन्वय, अनुभव साझा करने और संयुक्त अभियानों की समझ को और मजबूती मिलेगी।
भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और फ्रांस की सशस्त्र बल एवं पूर्व सैनिक मामलों की मंत्री कैथरीन वोत्रां ने मंगलवार को कर्नाटक के बेंगलुरु में छठे भारत–फ्रांस वार्षिक रक्षा संवाद की संयुक्त अध्यक्षता की। यह उच्चस्तरीय बैठक ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य तेजी से बदल रहा है और हिंद महासागर क्षेत्र सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बन चुका है।
बैठक के दौरान दोनों देशों ने रक्षा और सुरक्षा सहयोग को नई दिशा देने पर विस्तार से चर्चा की। रक्षा उपकरणों के संयुक्त विकास और संयुक्त उत्पादन, अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी में साझेदारी तथा दोनों देशों के रक्षा उद्योगों के बीच प्रत्यक्ष समन्वय को प्राथमिकता देने पर सहमति बनी।
दोनों मंत्रियों ने स्पष्ट किया कि भारत और फ्रांस के बीच रक्षा सहयोग केवल लेन-देन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आपसी विश्वास, साझा रणनीतिक दृष्टि और दीर्घकालिक प्रतिबद्धता पर आधारित संबंध है। इस वार्ता का सबसे महत्वपूर्ण निर्णय यह रहा कि भारत और फ्रांस के बीच रक्षा सहयोग समझौते को अगले दस वर्षों के लिए नवीनीकृत कर दिया गया। यह नवीनीकरण दोनों देशों के बीच स्थिर और विश्वसनीय रक्षा साझेदारी का प्रतीक माना जा रहा है।
बैठक के दौरान भारत की सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड और फ्रांस की रक्षा कंपनी सैफ्रान इलेक्ट्रॉनिक्स एंड डिफेंस के बीच भारत में हैमर मिसाइलों के निर्माण के लिए संयुक्त उद्यम स्थापित करने संबंधी समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।
इस पहल से देश में उन्नत शस्त्र प्रणालियों के निर्माण को बढ़ावा मिलेगा और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मजबूती मिलेगी। दोनों देशों ने यह भी घोषणा की कि भारतीय थल सेना और फ्रांसीसी थल सेना के प्रतिष्ठानों में अधिकारियों की पारस्परिक तैनाती की जाएगी। इससे सैन्य प्रशिक्षण, रणनीतिक समन्वय और परिचालन सहयोग को नया आयाम मिलेगा।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत हिंद महासागर क्षेत्र में “प्रथम प्रत्युत्तरकर्ता” और “क्षेत्रीय सुरक्षा प्रदाता” की भूमिका निभाता रहा है। भारत क्षेत्रीय देशों को रक्षा, समुद्री सुरक्षा और मानवीय सहायता के क्षेत्र में निरंतर सहयोग देता रहा है।
आतंकवाद के विषय में उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित सीमा पार आतंकवाद क्षेत्रीय शांति के लिए गंभीर चुनौती बना हुआ है।
फ्रांस की मंत्री कैथरीन वोत्रां ने भारत की मेजबानी के लिए आभार व्यक्त किया और भारतीय थल सेनाओं के संयुक्त सैन्य अभ्यास को द्विवार्षिक से वार्षिक किए जाने के निर्णय का स्वागत किया।
बेंगलुरु में आयोजित यह वार्ता भारत और फ्रांस के बीच बढ़ते रणनीतिक विश्वास, रक्षा सहयोग, और दीर्घकालिक साझेदारी को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और निर्णायक कदम मानी जा रही है।

