छत्तीसगढ़ : वन धन योजना ने जगिमा की आदिवासी महिलाओं को बनाया आत्मनिर्भर

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बलरामपुर, 18 फरवरी (आईएएनएस)। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम-जनमन) योजना का असर अब जमीनी स्तर पर दिखने लगा है। विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (पीवीटीजी) तक सरकारी योजनाओं और सुविधाओं को पहुंचाने के उद्देश्य से शुरू की गई यह पहल आदिवासी क्षेत्रों में सामाजिक और आर्थिक बदलाव की नई कहानी लिख रही है।

जिले के शंकरगढ़ विकासखंड अंतर्गत जगिमा गांव इसका जीवंत उदाहरण बनकर उभरा है, जहां पीएम-जनमन और वन धन योजना के समन्वय से आदिवासी महिलाओं के जीवन में बड़ा परिवर्तन आया है। कभी जंगलों में लकड़ी काटकर जीवनयापन करने वाली महिलाएं अब संगठित होकर स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

शंकर महिला सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं वन विभाग के सहयोग से फूल झाड़ू निर्माण का कार्य कर रही हैं, जिससे उन्हें नियमित आय का स्रोत मिला है और आत्मनिर्भरता की राह मजबूत हुई है।

बलरामपुर के डीएफओ आलोक बाजपेई ने आईएएनएस से बातचीत में बताया कि वनांचल क्षेत्र के आदिवासी समुदायों को रोजगार से जोड़ना प्रदेश सरकार और वन मंत्री की प्राथमिकता है।

उन्होंने कहा कि जगिमा क्षेत्र में पहाड़ी कोरवा समुदाय की महिलाओं द्वारा फूल झाड़ू का निर्माण कराया जा रहा है, जिसकी बिक्री शासकीय और गैर-शासकीय प्लेटफॉर्म के माध्यम से की जाएगी। इससे महिलाओं की आय में वृद्धि होगी और उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी।

उन्होंने बताया कि प्रथम चरण में फूल झाड़ू निर्माण पर ध्यान दिया जा रहा है, जबकि आगे मिलेट्स प्रोसेसिंग सहित अन्य व्यवसायिक योजनाओं पर भी कार्य करने की तैयारी है। इसके लिए विस्तृत बिजनेस प्लान तैयार किया गया है, जिसके आधार पर गतिविधियों का विस्तार किया जाएगा।

स्वयं सहायता समूह से जुड़ी पहाड़ी कोरवा समुदाय की विनीता ने बताया कि वन विभाग की ओर से उन्हें फूल झाड़ू बनाने का प्रशिक्षण दिया गया और वे पिछले दो महीनों से यह कार्य कर रही हैं। उन्होंने कहा कि झाड़ू बेचकर उनकी आमदनी बढ़ी है और वे आर्थिक रूप से पहले से अधिक मजबूत महसूस कर रही हैं।

एक अन्य सदस्य बिंदिया ने बताया कि प्रशिक्षण के बाद अब वे अच्छी गुणवत्ता की झाड़ू बना रही हैं, जिसे बाजार में अच्छी कीमत मिल रही है। एक झाड़ू की बिक्री 50 रुपए में होती है, जिसमें उन्हें 20 से 25 रुपए तक की बचत हो जाती है।

उन्होंने कहा कि बाजार में इसकी अच्छी मांग है। वे दो प्रकार की झाड़ू तैयार करती हैं। पीएम-जनमन और वन धन योजना के समन्वित प्रयासों से जगिमा गांव की महिलाएं अब आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं।