रांची, 18 फरवरी (आईएएनएस)। झारखंड के हजारीबाग जिला कोर्ट कैंपस में वर्ष 2015 में गैंगस्टर सुशील श्रीवास्तव समेत तीन लोगों की हत्या के मामले में निचली अदालत से दोषसिद्ध करार दिए गए पांच आरोपियों को झारखंड हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए विकास तिवारी, संतोष पांडेय, विकास कुमार सिंह, दिलीप साव और राहुल पांडेय को इस मामले में बरी कर दिया।
यह आदेश जस्टिस रंगोन मुखोपाध्याय और जस्टिस प्रदीप श्रीवास्तव की खंडपीठ ने आरोपियों की अपील याचिकाओं पर सुनवाई के बाद पारित किया। इससे पूर्व हजारीबाग सिविल कोर्ट ने सभी आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी और प्रत्येक पर 50-50 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया था।
बता दें कि 2 जून 2015 को हजारीबाग व्यवहार न्यायालय परिसर में दिनदहाड़े उस समय ताबड़तोड़ फायरिंग की गई थी, जब कुख्यात गैंगस्टर सुशील श्रीवास्तव को पेशी के लिए अदालत लाया गया था। हमलावरों ने भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच एके-47 जैसे स्वचालित हथियार का इस्तेमाल किया था। इस हमले में सुशील श्रीवास्तव के अलावा उनके सहयोगी कमाल खान और ग्यास खान की भी मौके पर ही मौत हो गई थी।
झारखंड में किसी अदालत परिसर में इस तरह एके-47 का इस्तेमाल कर खून-खराबे की यह पहली बड़ी घटना थी, जिसने राज्य की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। घटना के तत्काल बाद सुरक्षा में तैनात 19 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया था। मामले में हजारीबाग सदर थाना कांड संख्या 610/15 दर्ज कर विशेष जांच शुरू की गई थी।
पुलिस ने जांच में 1 अगस्त 2015 को विकास तिवारी को दिल्ली से गिरफ्तार किया था, जबकि अन्य आरोपियों को भी विभिन्न स्थानों से पकड़ा गया। अब हाईकोर्ट के फैसले के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। अदालत ने साक्ष्यों और परिस्थितियों के समग्र मूल्यांकन के आधार पर निचली अदालत के निर्णय को निरस्त करते हुए सभी अपीलकर्ताओं को दोषमुक्त कर दिया।

