नई दिल्ली, 17 फरवरी (आईएएनएस)। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को घोषणा की कि देश भर के शैक्षणिक संस्थानों को एआई तकनीक आधारित उपकरणों से लैस किया जाएगा। इससे छात्रों को नई तकनीकों की व्यावहारिक जानकारी मिलेगी और वे अपने समाधान विकसित कर सकेंगे।
इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान योरस्टोरी की संस्थापक श्रद्धा शर्मा से बातचीत में वैष्णव ने इस वैश्विक सम्मेलन से मिलने वाले अवसरों, निवेश और नवाचार की संभावनाओं पर विस्तार से बात की।
एआई इम्पैक्ट समिट को दुनिया के प्रमुख आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मंचों में से एक माना जाता है, जहां नैतिक एआई, नियामक ढांचे और उन्नत तकनीकों की भूमिका पर व्यापक चर्चा हो रही है, जो उद्योगों और सार्वजनिक सेवाओं को बदल रही हैं।
पांच दिवसीय इस समिट में 110 से अधिक देश और 30 अंतरराष्ट्रीय संगठन भाग ले रहे हैं, जिसमें लगभग 20 राष्ट्राध्यक्ष या सरकार प्रमुख और करीब 45 मंत्री शामिल हैं। यह एआई शासन और सहयोग पर केंद्रित सबसे बड़े आयोजनों में से एक है।
भारत की प्रगति पर बात करते हुए वैष्णव ने कहा, “देश एआई के सभी पांच स्तरों पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। निवेशकों, वेंचर कैपिटल फर्मों और युवाओं में इस नई तकनीक को लेकर जबरदस्त उत्साह है।”
उन्होंने बताया कि समिट के दौरान कई बड़े समाधान सामने आए हैं। उन्होंने कहा, “मुझे खुशी है कि भारत अगला हेल्थकेयर मॉडल और अगला कृषि उत्पादकता मॉडल दुनिया के सामने लाएगा, जो वैश्विक स्तर पर हमारा योगदान होगा।”
मंत्री ने बताया कि इस समिट के जरिए बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) क्षेत्र में लगभग 200 अरब डॉलर का निवेश आकर्षित हुआ है।
इसके अलावा, डीप-टेक और एप्लीकेशन लेयर में करीब 17 अरब डॉलर का निवेश प्रतिबद्ध किया गया है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में वेंचर कैपिटल फर्में खास रुचि दिखा रही हैं।
उन्होंने कहा, “दुनिया को भारत की क्षमता पर भरोसा है कि हम एआई आधारित समाधान विकसित कर सकते हैं, नए मॉडल बना सकते हैं और आबादी के स्तर पर इनोवेशन कर सकते हैं।”
युवा डेवलपर्स और उद्यमियों को संबोधित करते हुए वैष्णव ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को पांचवीं औद्योगिक क्रांति के लिए तैयार करना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि स्कूलों और कॉलेजों के पाठ्यक्रम में बदलाव किया जा रहा है, जिसे समिट के बाद लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा, “हम एआई मिशन के अगले संस्करण पर काम करेंगे, जिसके तहत छात्रों को एआई समाधान और एआई आधारित उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि वे तकनीक को सीख सकें और उससे परिचित हो सकें। देश में एआई का व्यापक प्रसार होने वाला है।”
स्टार्टअप्स को लेकर उन्होंने कहा कि सरकार उनका पूरा समर्थन करेगी। उन्होंने बताया कि विश्वसनीय वेंचर कैपिटल फर्मों द्वारा 17 अरब डॉलर की फंडिंग का वादा किया गया है।
उन्होंने कहा कि भारत आज दुनिया के शीर्ष तीन स्टार्टअप इकोसिस्टम में से एक है। एक दशक पहले जहां केवल 400-500 स्टार्टअप थे, आज उनकी संख्या 2 लाख से अधिक हो गई है। दुनिया हमारे लोगों की उद्यमशील ऊर्जा को पहचान रही है।
सेमीकंडक्टर क्षेत्र को लेकर वैष्णव ने कहा कि आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में लगभग 50 डीप-टेक स्टार्टअप उभर सकते हैं। उन्होंने संकेत दिया कि जल्द ही सेमीकंडक्टर उत्पादन की व्यावसायिक शुरुआत होने वाली है। उन्होंने कहा, “बहुत जल्द 10 इकाइयों में से एक से व्यावसायिक उत्पादन शुरू होगा। इसकी आधिकारिक घोषणा जल्द की जाएगी।”
एआई इम्पैक्ट समिट में वैश्विक नेता, नीति-निर्माता और तकनीकी विशेषज्ञ एआई की परिवर्तनकारी क्षमता पर चर्चा कर रहे हैं, जो आर्थिक विकास, बेहतर शासन और सामाजिक प्रगति को गति दे सकती है।
इस आयोजन का उद्देश्य एआई पहल को भारत की सभ्यतागत सोच ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ के साथ जोड़ना है और ‘एआई फॉर ह्यूमैनिटी’ के सिद्धांत को आगे बढ़ाना है।
इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट 2026 इस शृंखला का चौथा संस्करण है। इससे पहले यह सम्मेलन 2023 में यूनाइटेड किंगडम, 2024 में दक्षिण कोरिया और 2025 में फ्रांस में आयोजित किया गया था।
यह मंच एआई के नैतिक, आर्थिक और सामाजिक प्रभावों पर चर्चा करने के साथ-साथ डिजिटल तकनीक, व्यापार, संस्कृति, पर्यटन और समुद्री सहयोग में साझेदारी को भी मजबूत करता है।

