मुंबई, 19 फरवरी (आईएएनएस)। पोस्टर रिलीज के साथ विवादों में घिरी फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केस का निपटारा कर दिया है। शीर्ष अदालत ने यह भी आदेश दिया है कि फिल्म को लेकर कोई नई एफआईआर दर्ज नहीं होगी और न ही किसी याचिका पर सुनवाई होगी।
गुरुवार को सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने फिल्ममेकर्स को बड़ी राहत दी। सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर सुनवाई करते हुए निर्देश जारी किया है कि अब ‘घूसखोर पंडत’ से जुड़े विवाद को बंद किया जाना चाहिए। इसके साथ ही अदालत ने किसी नई याचिका पर भी सुनवाई से इनकार किया।
इसके साथ ही फिल्म मेकर्स ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा भी दायर किया है, जिसमें कहा गया है कि फिल्म मेकर्स और प्रोडक्शन हाउस का किसी धर्म, जाति या समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का कोई इरादा नहीं था। फिल्म एक काल्पनिक पुलिस ड्रामा है, जो एक अपराध की जांच पर आधारित है। फिल्म में किसी भी जाति, धर्म, समुदाय या संप्रदाय को भ्रष्ट नहीं दिखाया गया है।
हफलनामें में दावा किया गया कि फिल्म का पुराना नाम ‘घूसखोर पंडत’ वापस ले लिया गया है और नया नाम अभी तय नहीं हुआ है। साथ ही सभी प्रचार सामग्री, पोस्टर और ट्रेलर वापस ले लिए गए हैं।
इससे पहले मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म मेकर्स को कड़ी फटकार लगाई थी और अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर किसी वर्ग को निशाना बनाने पर लताड़ा भी था।
कोर्ट ने साफ-साफ कहा था कि अभिव्यक्ति की आजादी का मतलब ये नहीं है कि आप किसी वर्ग विशेष को नीचा दिखाएं। कोर्ट के आदेश के बाद ही अभिनेता मनोज बाजपेयी की फिल्म से जुड़े पोस्टर्स और प्रचार सामग्री को तुरंत प्रभाव से हटा लिया गया था। हालांकि, नया नाम क्या होने वाला है, इस पर सस्पेंस बरकरार है।
विवाद को लेकर फिल्म स्टार्स और मेकर्स दोनों सोशल मीडिया पर सफाई भी दे चुके हैं। अभिनेता मनोज बाजपेयी ने भी कहा था कि उनका उद्देश्य किसी की भावनाओं को आहत करना नहीं, बल्कि सिर्फ मनोरंजन करना है। उन्होंने पोस्ट के जरिए सभी से माफी भी मांगी थी और फिल्म का शीर्षक बदलने की जानकारी भी दी थी।

