नई दिल्ली, 19 फरवरी (आईएएनएस)। क्रिकेट खेलने वाला देश का हर युवा चाहता है कि वह भारतीय टीम के लिए खेले। साथ ही हर क्रिकेटर का सपना अपने देश में अपने लोगों के बीच खेलने का भी होता है। रोहन गावस्कर एक ऐसे क्रिकेटर हैं जिन्हें भारतीय टीम के लिए खेलने का मौका बेशक कम मिला, लेकिन उससे भी अफसोसजनक उनके लिए शायद यह होगा कि वह भारत में एक भी अंतरराष्ट्रीय मैच नहीं खेल सके।
रोहन गावस्कर का जन्म 20 फरवरी 1976 को कानपुर, उत्तर प्रदेश में हुआ था। रोहन महान बल्लेबाज सुनील गावस्कर के बेटे हैं। इसलिए क्रिकेट उनके खून में ही था और बड़े होकर उन्होंने भी इसी खेल में करियर बनाने का फैसला लिया।
रोहन का करियर सफलता, खेलने का अंदाज, और स्थान के आधार पर अपने पिता से बिल्कुल अलग रहा है। मुंबई का होने के बावजूद रोहन घरेलू क्रिकेट बंगाल की तरफ से खेले। सुनील गावस्कर दाएं हाथ के बल्लेबाज थे और ओपनर थे। रोहन बाएं हाथ के बल्लेबाज थे और मीडिल ऑर्डर में खेलते थे। सुनील गावस्कर धीमे थे, जबकि रोहन उनसे तेज बल्लेबाजी करते थे।
सफलता के मामले में रोहन गावस्कर अपने पिता से मीलों पीछे हैं। सुनील गावस्कर को क्रिकेट इतिहास के महानतम बल्लेबाजों में से एक माना जाता है, जबकि रोहन को भारत के लिए महज 11 वनडे खेलने का मौका मिला। इससे भी ज्यादा अफसोसजनक ये है कि एक भी मैच वह भारत में नहीं खेल पाए। वह भारतीय टीम के साथ ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और नीदरलैंड के दौरे पर गए थे।
रोहन गावस्कर ने 18 जनवरी 2024 को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे में डेब्यू किया था। 19 सितंबर 2004 को ही उन्होंने अपना आखिरी वनडे पाकिस्तान के खिलाफ खेला था। कुल 9 महीनों के दौरान 11 वनडे मैचों की 10 पारियों में 1 अर्धशतक की मदद से उन्होंने 151 रन बनाए। 54 उनका सर्वाधिक स्कोर रहा। रोहन को कभी वनडे या टी20 में भारत की तरफ से खेलने का मौका नहीं मिला।
बंगाल की तरफ से घरेलू क्रिकेट खेलने वाले और टीम के कप्तान रहे रोहन ने 117 प्रथम श्रेणी मैचों की 181 पारियों में 18 शतक लगाते हुए 6,938 रन बनाए। वहीं, 126 लिस्ट ए मैचों में 1 शतक और 19 अर्धशतक लगाते हुए 3,157 रन बनाए। वह आईपीएल में केकेआर के लिए खेल चुके हैं।
रोहन गावस्कर ने 8 फरवरी 2012 को आधिकारिक रूप से क्रिकेट को अलविदा कह दिया था। संन्यास के बाद वह अपने पिता सुनील गावस्कर की तरह ही बतौर कमेंटेटर सक्रिय हैं।

