नई दिल्ली, 19 फरवरी (आईएएनएस)। राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ के चौथे दिन एक खास पल देखने को मिला, जब दिग्गज टेक कंपनी अल्फाबेट और गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने भारत जीआई कॉफी लाउंज में भारतीय कॉफी का स्वाद चखा और उत्साह से “वॉव!” कह उठे।
उन्होंने खासतौर पर मालाबार अरेबिका कॉफी की तारीफ करते हुए कहा कि यह उनके दिल के बेहद करीब है। डीपीआईआईटी द्वारा स्थापित भारत जीआई कॉफी लाउंज में पिचाई ने न सिर्फ कॉफी का आनंद लिया, बल्कि बारिस्टा से बातचीत की और ग्रुप तस्वीर भी खिंचवाई।
अराकू से लेकर कूर्ग तक की प्रीमियम जीआई कॉफी ने एआई समिट में सभी का ध्यान आकर्षित किया। यह लाउंज भारत की पारंपरिक विरासत (जीआई), डिजिटल भुगतान प्रणाली (यूपीआई) और आधुनिक तकनीक (एआई) के संगम का प्रतीक बन गया।
गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस समिट का उद्घाटन किया, जिसमें भारत और विदेश के कई बड़े नेता और उद्योग जगत के दिग्गज शामिल हुए।
इससे पहले अपने संबोधन में सुंदर पिचाई ने कहा कि भारत में बदलाव की रफ्तार बेहद प्रभावशाली है। उन्होंने बताया कि गूगल भारत-अमेरिका कनेक्ट पहल के तहत अमेरिका और भारत के बीच समुद्र के नीचे फाइबर ऑप्टिक केबल का विशाल नेटवर्क बिछा रहा है, जिसमें चार नई प्रणालियां शामिल हैं। उन्होंने कहा कि एआई के क्षेत्र में साहसिक कदम उठाने की जरूरत है, क्योंकि यह अरबों लोगों के जीवन को बदल सकता है।
पिचाई ने उदाहरण देते हुए बताया कि पिछले 50 वर्षों से प्रोटीन संरचना की भविष्यवाणी एक बड़ी चुनौती थी, जिससे दवा खोज की प्रक्रिया प्रभावित होती थी। लेकिन आज एआई की मदद से 190 देशों के 30 लाख से अधिक शोधकर्ता इसका उपयोग कर रहे हैं और मलेरिया जैसी बीमारियों के टीके विकसित किए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी घोषणा की कि गूगल भारत में 15 अरब डॉलर के निवेश के तहत एक पूर्ण एआई हब स्थापित कर रहा है। कंपनी स्वास्थ्य, कृषि, स्टार्टअप और अन्य क्षेत्रों में एआई का व्यापक उपयोग कर रही है।
समिट में 300 से अधिक विशेष प्रदर्शनी पवेलियन और लाइव डेमो आयोजित किए गए, जिन्हें पीपल, प्लैनेट और प्रोग्रेस जैसे तीन थीम पर आधारित रखा गया। इसमें 600 से ज्यादा उभरते स्टार्टअप्स ने भाग लिया, जो वैश्विक स्तर के समाधान विकसित कर रहे हैं। इन स्टार्टअप्स ने ऐसे उत्पाद और सेवाएं प्रस्तुत कीं, जो पहले से वास्तविक जीवन में लागू हो चुकी हैं।
इसके अलावा, 500 से अधिक सत्रों का आयोजन किया गया, जिनमें 3,250 से ज्यादा विशेषज्ञों और वक्ताओं ने भाग लिया। इन चर्चाओं का उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों में एआई के प्रभाव को समझना और यह सुनिश्चित करना था कि तकनीक का लाभ दुनिया के हर नागरिक तक पहुंचे।

