नई दिल्ली, 19 फरवरी (आईएएनएस)। नौसैनिक अभ्यास ‘मिलन’ के 13वें संस्करण के अवसर पर नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी ने एक स्पष्ट और मजबूत संदेश दिया है कि यदि समुद्र सुरक्षित रहेगा तो दुनिया सुरक्षित रहेगी और इसके लिए अलग-अलग देशों को एक साथ आना होगा।
गौरतलब है कि भारतीय नौसेना के नौसैनिक अभ्यास ‘मिलन’ में 74 देश शामिल हो रहे हैं। नौसेना प्रमुख ने गुरुवार को दुनिया के 74 देशों से आए प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए मिलन को ‘समुद्री महाकुंभ’ बताया। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ युद्धाभ्यास नहीं, बल्कि भरोसे, तालमेल और साझेदारी का मंच है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह इस दौरान मौजूद रहे। रक्षा मंत्री की मौजूदगी को नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी ने विशेष महत्व का बताते हुए कहा कि यह दिखाता है कि भारत सरकार समुद्री सुरक्षा को लेकर पूरी तरह गंभीर है। नौसेना प्रमुख ने स्पष्ट किया कि आज समुद्री चुनौतियां एक देश तक सीमित नहीं हैं, चाहे फिर वह समुद्री डकैती हो, तस्करी, आतंकवाद या प्राकृतिक आपदा। उन्होंने कहा कि इनसे निपटने के लिए साझा रणनीति और संयुक्त कार्रवाई जरूरी है।
उन्होंने प्रधानमंत्री की ‘महासागर’ परिकल्पना का जिक्र करते हुए कहा कि भारतीय नौसेना बराबरी के आधार पर साझेदारी में विश्वास रखती है। हर देश की अपनी ताकत है, और इन्हें जोड़कर सामूहिक शक्ति बनाई जा सकती है। नौसेना प्रमुख ने बताया कि भारतीय नौसेना वैश्विक, क्षेत्रीय और पड़ोसी देशों के साथ तीन स्तर पर सहयोग बढ़ा रही है। हिंद महासागर क्षेत्र में संयुक्त तैनाती, अफ्रीकी देशों के साथ नए अभ्यास और पड़ोसियों को संकट के समय मदद, ये सब उसी रणनीति का हिस्सा हैं। मिलन अभ्यास 1995 में शुरू हुआ था। अब यह भरोसे का बड़ा मंच बन चुका है। इस बार 74 देशों की भागीदारी इसे अब तक का सबसे बड़ा संस्करण बना रही है। यह भारत की बढ़ती समुद्री भूमिका और वैश्विक विश्वास का संकेत भी है। इस अभ्यास के अंतर्गत आने वाले दिनों में विभिन्न देशों की नौसेनाएं समुद्र में जटिल युद्धाभ्यास करेंगी, रणनीतिक चर्चा करेंगी और एक-दूसरे के अनुभवों से सीखेंगी। साथ ही सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होंगे, जिससे देशों के बीच रिश्ते और मजबूत होंगे।
नौसेना प्रमुख ने कहा कि भारत में लोगों को जोड़ने और साझा संकल्प को मजबूत करने की परंपरा रही है। उसी भावना से आयोजित मिलन को उन्होंने ‘समुद्री महाकुंभ’ की संज्ञा दी। यहां अलग-अलग देशों की नौसेनाएं एक साझा उद्देश्य के साथ एकत्रित हुई हैं ताकि समुद्र सुरक्षित, संरक्षित और सबके लिए खुला बना रहे।
उन्होंने कहा कि एक समुद्री राष्ट्र होने के नाते भारत भली-भांति समझता है कि आज की समुद्री चुनौतियां जटिल, आपस में जुड़ी हुई और सीमाओं से परे हैं। इनसे निपटने का एकमात्र रास्ता सहयोग और साझेदारी है।
मित्र देशों के साथ सहयोग पर उन्होंने बताया कि आईओएस सागर के तहत हिंद महासागर क्षेत्र के नौ देशों के 44 कर्मियों के साथ संयुक्त तैनाती की गई थी। अब आईओएस सागर 2.0 अप्रैल में और बड़े स्तर पर तैनात होगा। इसी तरह अफ्रीका-भारत प्रमुख समुद्री सहभागिता अभ्यास ने यह दिखाया कि अगर इरादा मजबूत हो तो दूरी कभी बाधा नहीं बनती। पड़ोसी देशों के संदर्भ में भारत की ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि संकट और आपदा के समय भारत एक भरोसेमंद प्रथम प्रतिक्रियाकर्ता की भूमिका निभाता रहा है।
मिलन अभ्यास के बारे में बोलते हुए नौसेना प्रमुख ने बताया कि 1995 में शुरू हुआ यह अभ्यास अब निरंतरता और भरोसे का प्रतीक बन चुका है। 13वें संस्करण में 74 देशों की भागीदारी इसे अब तक का सबसे बड़ा आयोजन बना रही है। यह व्यापक सहभागिता इस मंच पर बढ़ते विश्वास और साझा प्रतिबद्धता का संकेत है। अंत में नौसेना प्रमुख ने विश्वास जताया कि मिलन 2026 समुद्री सुरक्षा की दिशा में एक ऐतिहासिक पड़ाव साबित होगा और सुरक्षित, संरक्षित व खुले समुद्र की दिशा में ठोस कदम आगे बढ़ाएगा।

