लखनऊ, 19 फरवरी (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश में तम्बाकू नियंत्रण को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्य सचिव एसपी गोयल की अध्यक्षता में राष्ट्रीय तम्बाकू नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत गठित राज्य स्तरीय समन्वय समिति की बैठक में सिगरेट एवं अन्य तम्बाकू उत्पाद अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए।
बैठक में मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों में तम्बाकू के विरुद्ध विशेष जागरूकता अभियान चलाया जाए। उन्होंने कहा कि तम्बाकू के दुष्प्रभावों के प्रति बच्चों और युवाओं को प्रारंभिक स्तर से ही जागरूक करना आवश्यक है, इसलिए प्राथमिक विद्यालयों में भी तम्बाकू से संबंधित विषय को पाठ्यक्रम अथवा सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में शामिल किया जाए।
मुख्य सचिव ने सभी सरकारी कार्यालयों को ‘तम्बाकू मुक्त’ घोषित करने के निर्देश दिए। साथ ही, शैक्षणिक संस्थानों को मान्यता प्रदान करते समय “तम्बाकू मुक्त शैक्षणिक संस्थान” संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन अनिवार्य किए जाने पर बल दिया। युवाओं में तम्बाकू सेवन की बढ़ती प्रवृत्ति पर चिंता जताते हुए उन्होंने तम्बाकू उत्पादों से जुड़े ग्लैमर को समाप्त करने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार अभियान चलाने के निर्देश भी दिए।
बैठक में यह भी निर्देशित किया गया कि सभी चिकित्सक और स्वास्थ्यकर्मी प्रत्येक उपलब्ध अवसर पर तम्बाकू सेवन न करने की संक्षिप्त सलाह अवश्य दें। स्वास्थ्य कर्मियों की क्षमता वृद्धि के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप तम्बाकू निषेध केंद्र समयबद्ध रूप से स्थापित किए जाने पर भी जोर दिया गया।
इसके अतिरिक्त, तम्बाकू विक्रेता लाइसेंसिंग व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने तथा तम्बाकू विक्रेताओं की दो दुकानों के बीच न्यूनतम 500 मीटर की दूरी सुनिश्चित करने के प्रस्ताव पर भी विचार-विमर्श किया गया। मुख्य सचिव ने कहा कि तम्बाकू नियंत्रण कानूनों का सख्ती से पालन कर प्रदेश को स्वस्थ और जागरूक समाज की दिशा में आगे बढ़ाया जाएगा।

