अमीन सयानी: बैन के साथ शुरू हुआ रेडियो करियर, अपने दौर में आवाज की दुनिया के ‘शहंशाह’ ने अमिताभ बच्चन को भी कर दिया था रिजेक्ट

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नई दिल्ली, 19 फरवरी (आईएएनएस)। आवाज की दुनिया के दो दिन हिंदुस्तान में हमेशा के लिए अमर हो चुके हैं। जब भी गाने की बात होती है तो लता मंगेशकर का नाम लिए बगैर पूरी नहीं होती है। ठीक उसी तरह जब रेडियो के इतिहास और उस पर बोलने वालों के किस्से सुनाए जाते हैं तो वह बात अमीन सयानी का नाम लिए बगैर पूरी नहीं हो सकती है, क्योंकि भारतीयों की तीन पीढ़ियों के लिए रेडियो का मतलब एक ही नाम था और वो था अमीन सयानी। उस आवाज के सब दीवाने थे।

जब भारत आजादी की तरफ बढ़ रहा था, गुलामी, संघर्ष और आजादी की आवाजें हर ओर गूंजा करती थीं। उस माहौल में 21 दिसंबर 1932 को अमीन सयानी का जन्म हुआ।

आवाज की दुनिया में उनका आने का किस्सा बड़ा दिलचस्प है। उम्र लगभग 9 साल थी। बड़े भाई हामिद एक बार उन्हें ऑल इंडिया रेडियो के मुंबई स्टेशन लेकर पहुंचे थे। उस दौर में वायर रिकॉर्डर नया-नया आया था। भाई ने उन्हें आवाज रिकॉर्ड करने के लिए बैठा दिया। वह पहला मौका था, जब उन्होंने अपनी आवाज को पहली बार रिकॉर्ड करके सुना था। तब से आवाज की दुनिया से उनका नाता जुड़ गया। एक इंटरव्यू में अमीन सयानी ने यह किस्सा खुद सुनाया था।

अपने दर्शकों के लिए वह एक प्रेजेंटर से कहीं ज्यादा थे। एक गर्मजोशी भरी और प्यारी आवाज के साथ उन्होंने ब्रॉडकास्टिंग का एक खुशनुमा, अनोखा स्टाइल बनाया, जो एक सच्चे दोस्त की इमेज बनाता था जो अपने रेडियो सेट के जरिए हर सुनने वाले से सीधे बात कर रहा हो। एक ऐसा दोस्त जिसने एक ऐसा ग्रुप बनाया, जिसमें कोई जेनरेशन गैप नहीं था। उनकी रेडियो शैली एकदम सटीक थी। उनका दोस्ताना और आत्मीय ‘बहनों और भाइयों’ पूरे देश में पहचाना जाने वाला अभिवादन बन गया।

अमीन सयानी का रेडियो करियर एक बैन के साथ शुरू हुआ। 1952 की सर्दियों में भारत के सूचना और प्रसारण मंत्री बालकृष्ण विश्वनाथ केसकर ने कुछ समय के लिए ऑल इंडिया रेडियो पर क्रिकेट कमेंट्री और हिंदी फिल्म संगीत पर प्रतिबंध लगा दिया था। उनका मानना ​​था कि इससे शास्त्रीय संगीत को बहुत नुकसान हो रहा है। ऑल इंडिया रेडियो पर हिंदुस्तानी और कर्नाटक क्लासिकल म्यूजिक ने फिल्मी गानों की जगह ले ली।

केसकर का यह गलत फैसला सयानी के लिए सबसे बड़ा वरदान साबित हुआ। रेडियो सीलोन, जो दूसरे वर्ल्ड वॉर के दौरान श्रीलंका के कोलंबो में साउथ एशिया में तैनात ब्रिटिश सैनिकों तक म्यूजिक और न्यूज पहुंचाने के लिए बनाया गया एक रेडियो स्टेशन था, उनके लिए नया दौर लेकर आया। इसमें सयानी बंधुओं को काम पर रख लिया गया।

केसकर के बैन के कुछ महीने बाद 3 दिसंबर 1952 को रेडियो सीलोन के मजबूत मिलिट्री ट्रांसमीटरों ने पहली बार पूरे भारत में घरों में बिनाका गीतमाला (गीतों की माला) पहुंचाई, जिसमें 20 साल के अमीन सयानी का खुशमिजाज और चुटीला अभिवादन था, “बहनों और भाइयों”। सयानी का खुशमिजाज स्टाइल, उनके मधुर सुर और साथ ही ‘भाइयों और बहनों’ ने शो को तुरंत हिट बना दिया।

उनका ओरिजिनल रेडियो शो ‘बिनाका गीतमाला’ 42 साल तक चला, जिसने कई गीतकारों, कंपोजर्स और सिंगर्स को घर-घर में मशहूर कर दिया और कई फिल्मों को गुमनामी से भी बचाया। आजाद भारत के सफर के ज्यादातर समय तक चले अपने करियर में सयानी ने कम से कम 50 हजार रेडियो प्रोग्राम रिकॉर्ड किए, 19 हजार जिंगल्स में अपनी आवाज दी, टीवी शो होस्ट किए और कुछ बॉलीवुड फिल्मों में वॉयसओवर और कैमियो किए।

अमीन सयानी वे शख्सियत थे, जिन्होंने एक बार बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन को भी रिजेक्ट कर दिया था। हुआ कुछ यूं कि अमिताभ बच्चन बॉलीवुड में किस्मत आजमाने से पहले रेडियो उद्घोषक बनना चाहते थे। ऑल इंडिया रेडियो के मुंबई स्टूडियो में दुबले-पतले अमिताभ इंटरव्यू देने गए थे। उस समय अमीन सयानी अपने कार्यक्रमों में लगातार व्यस्त रहा करते थे। इंटरव्यू में अमिताभ बच्चन के सामने अमीन सयानी ही बैठे थे। अमिताभ की आवाज कुछ इस तरह की थी कि अमीन सयानी ने उन्हें रिजेक्ट कर दिया था। खुद अमीन सयानी और अमिताभ बच्चन ने अपने इंटरव्यू में इन बातों का जिक्र किया था।

अमीन सयानी, जिनका करियर भारत में रेडियो के सुनहरे दौर की पहचान है, उन्होंने दूसरे पॉपुलर शो भी होस्ट किए। उन्होंने रेडियो के लिए सैकड़ों 15-मिनट के फिल्म प्रोमो बनाए और रेडियो व टीवी पर टूथपेस्ट और सिरदर्द की गोलियां बेचीं।

20 फरवरी 2024 को यह आवाज हमेशा के लिए खामोश हो गई। 91 वर्ष की उम्र में अमीन सयानी का निधन हो गया।