नई दिल्ली, 20 फरवरी (आईएएनएस)। भगवान गणेश की उपासना के लिए विशेष महत्व रखने वाली ढुण्ढिराज चतुर्थी 21 फरवरी को है। मत्स्य पुराण में इसे मनोरथ चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर भगवान गणेश के ढुण्ढिराज स्वरूप की पूजा-अर्चना करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और विघ्नों का नाश होता है।
ढुण्ढिराज चतुर्थी पर गणेश जी की आराधना का विशेष महत्व है। गणपति को लाल फूल, दूर्वा, मोदक और सिंदूर चढ़ाकर विधिवत पूजा करना। मंत्र का जाप या स्त्रोत का पाठ विशेष फलदायी होगा। इस व्रत से बुद्धि, समृद्धि और सफलता की प्राप्ति होती है। जीवन से बाधाओं का नाश होता है और सफलता के द्वार खुलते हैं।
दृक पंचांग के अनुसार, चतुर्थी तिथि 20 फरवरी को दोपहर 2 बजकर 38 मिनट से शुरू होकर 21 फरवरी की दोपहर 1 बजे तक रहेगी। उदयातिथि के आधार पर यह तिथि 20 फरवरी (शनिवार) को पूरे दिन मान्य होगी। इस दिन कई शुभ योग बन रहे हैं, जो पूजा के लिए अत्यंत उत्तम हैं। रवि योग सुबह 6 बजकर 54 मिनट से शाम 7 बजकर 7 मिनट तक रहेगा, जो सूर्य की शक्ति से युक्त होता है और कार्य सिद्धि में सहायक माना जाता है।
वहीं, अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 12 मिनट से 12 बजकर 58 मिनट तक है, जिसे सर्वश्रेष्ठ मुहूर्तों में से एक माना जाता है। अन्य शुभ काल में विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 28 मिनट से 3 बजकर 14 बजे तक, अमृत काल शाम 4 बजकर 49 मिनट से 6 बजकर 21 मिनट तक और गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 13 मिनट से 6 बजकर 38 मिनट तक रहेगा।
ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 13 मिनट से 6 बजकर 4 मिनट तक रहेगा, जो ध्यान और पूजा के लिए सर्वोत्तम होता है। वहीं, सूर्योदय 6 बजकर 54 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 15 मिनट पर होगा। हालांकि, कुछ अशुभ समय भी हैं, जिनसे बचना चाहिए। भद्रा सुबह 6 बजकर 54 मिनट से दोपहर 1 बजे तक रहेगी, इसलिए इस दौरान पूजा-पाठ या शुभ कार्य की मनाही होती है। पंचक भी सुबह 6 बजकर 54 मिनट से शाम 7 बजकर 7 मिनट तक प्रभावी रहेगा।
राहुकाल सुबह 9 बजकर 45 मिनट से 11 बजकर 10 मिनट तक, यमगंड दोपहर 2 बजे से 3 बजकर 25 मिनट तक और गुलिक काल सुबह 6 बजकर 54 मिनट से 8 बजकर 19 मिनट तक रहेगा। इन कालों में कोई नया कार्य या पूजा -पाठ नहीं करनी चाहिए।

