श्रीनगर, 20 फरवरी (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने शुक्रवार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार सौदे से सेब को बाहर करके कश्मीरी बागवानी के हितों की तुरंत रक्षा करने की अपील की।
महबूबा ने जीरो-ड्यूटी अमेरिकी सेब आयात की रिपोर्टों पर गहरी चिंता जताते हुए चेतावनी दी कि ऐसा कदम कश्मीर की बागवानी अर्थव्यवस्था को ‘खत्म करने वाला झटका’ होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि बागवानी कश्मीर की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, जो सात लाख से ज्यादा परिवारों को सहारा देती है, जिनकी रोजी-रोटी, बच्चों की पढ़ाई और हेल्थकेयर पूरी तरह इस पर निर्भर करते हैं।
उन्होंने कहा, “यह सेक्टर पहले से ही एसएएफटीए के जरिए कम कीमत वाले ईरानी इंपोर्ट के कारण मुश्किल में है, जिससे बाजार की कीमतें कम हो गई हैं और स्थानीय उपज की मांग कम हो गई है। हमारे बाजारों में भारी सब्सिडी वाले अमेरिकी सेबों की बाढ़ आ जाएगी, जिससे एक प्राइस वॉर शुरू हो जाएगा जिसे हम जीत नहीं सकते।” महबूबा ने लोकल किसानों को होने वाले स्ट्रक्चरल नुकसानों पर जोर दिया, जिसमें क्लाइमेट की अनिश्चितता, कमजोर सप्लाई चेन और ज्यादा ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट शामिल हैं, और इसकी तुलना अमेरिकी किसानों को मिलने वाली भारी सब्सिडी से की।
उन्होंने जोर देकर कहा, “कश्मीरी सेबों को बचाना प्रोटेक्शनिज्म नहीं है; यह रोजी-रोटी, विरासत और खेती की इज्जत को बचाने के बारे में है।”
उन्होंने मांग की कि सरकार सेब को इंडो-यूएस ट्रेड लिस्ट से बाहर रखे, सबको बराबर मौका देने के लिए कम से कम 50 प्रतिशत इंपोर्ट ड्यूटी बनाए रखे, मिनिमम इंपोर्ट प्राइस (एमआईपी) सिस्टम को सख्ती से लागू करे और लोकल किसानों को टारगेटेड सब्सिडी, आसान क्रेडिट और इंफ्रास्ट्रक्चर सपोर्ट दे।
महबूबा ने चेतावनी दी, “अगर केंद्र कार्रवाई करने में नाकाम रहता है, तो लाखों बागवान परिवार ऐसे फाइनेंशियल संकट में पड़ जाएंगे जिसे ठीक नहीं किया जा सकता।”

