नई दिल्ली, 20 फरवरी (आईएएनएस)। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने स्पेन को भारत में अपने शैक्षणिक कैंपस स्थापित करने के लिए खुला निमंत्रण दिया। इस विषय पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शुक्रवार को कहा कि शिक्षा, रिसर्च और युवाओं के आदान-प्रदान को नई दिशा देना बेहद महत्वपूर्ण है।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 वैश्विक शैक्षणिक सहयोग को बढ़ावा देती है। उन्होंने स्पेन के प्रमुख विश्वविद्यालयों को भारत में अपने कैंपस स्थापित करने के लिए खुला निमंत्रण दिया। उनका स्पष्ट संदेश था कि भारत खुले मन से साझेदारी का स्वागत करता है। भारत–स्पेन उच्च शिक्षा सम्मेलन में दोनों देशों के कई विश्वविद्यालयों के प्रमुख, शिक्षाविद् और नीति-निर्माता शामिल हुए।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने समापन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि 2026 में मनाया जा रहा स्पेन–भारत ‘डुअल ईयर’ दोनों देशों के कूटनीतिक संबंधों के 70 वर्ष पूरे होने का प्रतीक है। ऐसे समय में शिक्षा, शोध और युवाओं के आदान-प्रदान को नई दिशा देना बेहद महत्वपूर्ण है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत की राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 वैश्विक शैक्षणिक सहयोग को बढ़ावा देती है।
उन्होंने एआई के मुद्दे पर भी साफ कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मानव की सोच, रचनात्मकता और नैतिक जिम्मेदारी को मजबूत करे, उसे प्रतिस्थापित न करे। नवाचार को दिशा देने में लोकतांत्रिक देशों की भूमिका अहम है। भारत व स्पेन इस दिशा में मिलकर काम करने को प्रतिबद्ध हैं। उनके मुताबिक, यह सम्मेलन ठोस परिणाम देने की दिशा में एक कदम है। आज जो ज्ञान के पुल बने हैं, वे आने वाले कल के युवाओं के आत्मविश्वास को आकार देंगे।
एआई पर उन्होंने दिलचस्प बात कही कि तकनीक इंसान की जगह लेने के लिए नहीं, बल्कि इंसान की सोच और रचनात्मकता को मजबूत करने के लिए है। भारत में स्पेन के राजदूत जुआन एंटोनियो मार्च पुजोल ने कहा कि भारत व स्पेन के छात्रों की संयुक्त रिसर्च, छात्रों और शिक्षकों का आदान-प्रदान, और स्टार्ट-अप्स को सहयोग जैसी पहल पर काम शुरू हो चुका है। उम्मीद है कि इसी साल स्पेन में अगली बड़ी बैठक होगी, जहां समझौते भी साइन हो सकते हैं।
समापन कार्यक्रम में स्पेन के विश्वविद्यालयों के संगठन सीआरयूई की अध्यक्ष एवा एल्कोन का कहना था कि ये अंत नहीं, असली शुरुआत है। दोनों देशों का लक्ष्य उच्च शिक्षा तक बराबर पहुंच, सतत विकास और ग्लोबल हेल्थ जैसे मुद्दों पर मिलकर आगे बढ़ना है।
इस सम्मेलन में स्पेन से 30 से ज्यादा कुलपति आए, और भारत की करीब 70 यूनिवर्सिटीज शामिल हुईं। इस सम्मेलन ने दर्शाया कि भारत और स्पेन की दोस्ती मुलाकातों से बढ़कर लैब, कैंपस, पुस्तकों और स्टार्ट-अप की दुनिया में उतरने जा रही है। आने वाले सालों में इसके व्यापक प्रभाव दिख सकते हैं।

