एआई आधारित तकनीक प्रतिभा निखारने में अहम भूमिका निभा सकती है: श्रेयसी सिंह

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गयाजी, 21 फरवरी (आईएएनएस)। बिहार की खेल मंत्री श्रेयसी सिंह ने शनिवार को कहा कि बिहार सरकार खेल के विकास को सक्रिय रूप से प्रोत्साहित कर रही है तथा एआई-आधारित तकनीक प्रतिभा पहचान, प्रदर्शन मूल्यांकन और चोट प्रबंधन प्रणालियों को काफी बेहतर बना सकती है।

उन्होंने यह भी कहा कि आधुनिक खेल प्रशासन में वैज्ञानिक अनुसंधान, डिजिटल नवाचार और नैतिक जिम्मेदारी का समन्वय आवश्यक है ताकि खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की उत्कृष्टता के लिए तैयार किया जा सके।

दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) के शारीरिक शिक्षा विभाग द्वारा “खेल विज्ञान, स्वास्थ्य सेवा एवं नैतिकता में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई)” विषय पर तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन के शुभारंभ के मौके पर उन्होंने युवा शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों से राष्ट्र निर्माण और खेल उन्नति के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता को एक सशक्त उपकरण के रूप में अपनाने का आह्वान किया।

मंत्री श्रेयसी सिंह ने ऐसे दूरदर्शी एवं प्रभावशाली विषय पर सम्मेलन आयोजित करने के लिए सीयूएसबी की सराहना की। सीयूएसबी के कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता अब भविष्य की अवधारणा नहीं, बल्कि वर्तमान की आवश्यकता बन चुकी है, जो खेल प्रदर्शन विश्लेषण, खिलाड़ियों के स्वास्थ्य निगरानी और शैक्षणिक अनुसंधान पद्धतियों को रूपांतरित कर रही है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विश्वविद्यालयों को उभरती तकनीकों को जिम्मेदारी और नैतिकता के साथ अपनाना चाहिए ताकि नवाचार मानवीय मूल्यों और राष्ट्रीय विकास लक्ष्यों के अनुरूप हो। उन्होंने समसामयिक विषय पर राष्ट्रीय महत्व के इस सम्मेलन के आयोजन के लिए शारीरिक शिक्षा विभाग की भी सराहना की।

इस मौके पर बीएचयू के डीन प्रो. सुषमा घिल्डियाल ने शिक्षा, मानविकी और खेल विज्ञान में एआई की अंतर्विषयक प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला तथा अनुसंधान और शिक्षण में एआई के समावेशन के दौरान नैतिक जागरूकता के महत्व पर बल दिया। इस सम्मेलन में देशभर से 82 विशेषज्ञों ने सहभागिता की तथा कुल 110 शोध पत्र प्रस्तुत किए जाएंगे।